अनिल अंबानी ग्रुप से तीसरी गिरफ़्तारी, कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट

Sandesh Wahak Digital Desk: अनिल अंबानी (Anil Ambani) ग्रुप पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। देश के चर्चित उद्योगपति अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस पावर पर 68 करोड़ रुपये की कथित फर्जी बैंक गारंटी मामले में ईडी ने तीसरी गिरफ्तारी की है। इस कार्रवाई के बाद बाजार में हड़कंप मच गया है और कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली है।

तीसरी गिरफ्तारी से बढ़ी मुश्किलें

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमर नाथ दत्ता नामक व्यक्ति को ईडी ने गुरुवार को गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की गई है। विशेष अदालत ने उन्हें चार दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
इस मामले में अब तक तीन लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इससे पहले कंपनी के सीएफओ अशोक कुमार पाल और ओडिशा की बिस्वाल ट्रेडलिंक कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर पार्थ सारथी बिस्वाल को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।

ईडी की जांच में यह मामला 68.2 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी से जुड़ा बताया जा रहा है। एजेंसी का कहना है कि यह फर्जी गारंटी कुछ बैंकों के नाम पर जारी की गई थी, जबकि बैंकों के रिकॉर्ड में ऐसी कोई गारंटी मौजूद नहीं थी।

Anil Ambani

शेयर बाजार में हड़कंप

वहीं ईडी की इस कार्रवाई का सीधा असर बाजार में देखने को मिला। शुक्रवार (7 नवंबर) को बीएसई पर रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयरों में 5 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। खबर लिखे जाने तक कंपनी के शेयर ₹174.85 प्रति शेयर पर ट्रेड कर रहे थे, जो पिछले कारोबारी दिन की तुलना में करीब ₹9.20 की गिरावट दर्शाते हैं।

वहीं, रिलायंस पावर के शेयरों में भी 2.53 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बीएसई पर यह शेयर ₹40.04 पर कारोबार कर रहे थे। पिछले दिन की तुलना में यह ₹1.04 की गिरावट थी। इसमें महत्वपूर्ण बात यह है कि कुछ ही दिन पहले रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयर 52 सप्ताह के उच्चतम स्तर ₹425 तक पहुंचे थे। अब निवेशकों में इस गिरावट को लेकर चिंता बढ़ गई है।

कंपनी ने दी सफाई

वहीं ईडी की इस कार्रवाई के बीच रिलायंस ग्रुप की ओर से एक बयान जारी किया गया है। कंपनी ने कहा कि अनिल अंबानी का इस पूरे मामले से कोई संबंध नहीं है। कंपनी का दावा है कि यह मामला कुछ व्यक्तियों द्वारा की गई गड़बड़ियों से जुड़ा है और इसका ग्रुप की नीतिगत कार्यप्रणाली या प्रबंधन से कोई सीधा संबंध नहीं है।

ईडी की जांच जारी

वहीं ईडी सूत्रों के मुताबिक, मामले से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। एजेंसी को शक है कि यह फर्जी बैंक गारंटी कर्ज या फंडिंग के लिए इस्तेमाल की गई थी। ऐसे में जांच के दायरे में अब और नाम जुड़ सकते हैं। प्रवर्तन निदेशालय आने वाले दिनों में रिलायंस पावर और उससे जुड़ी कंपनियों से जुड़े कई अधिकारियों से पूछताछ कर सकता है।

 

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