इलाहाबाद है भाई, भांग का नशा उतरने में टाइम लगेगा: CJI Suryakant
Sandesh Wahak Digital Desk: Supreme Court of India में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत (CJI Suryakant) की एक टिप्पणी इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। हालांकि यह टिप्पणी पूरी तरह मजाकिया अंदाज में की गई थी, लेकिन इसके लहजे ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मामला सुरेश देवी बनाम इलाहाबाद हाईकोर्ट से जुड़ा है, जिसमें अगली सुनवाई की तारीख तय की जानी थी।
तारीख तय करते समय आया होली का जिक्र
सुनवाई के दौरान CJI Suryakant की बेंच इस बात पर विचार कर रही थी कि केस को किस दिन सूचीबद्ध किया जाए। चूंकि आने वाले दिनों में होली का त्योहार है और अदालतों में छुट्टियां रहने वाली हैं, इसलिए तारीख को लेकर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि मामले को होली की छुट्टियों के बाद रखा जाए। उन्होंने अपनी बात को दोहराते हुए यह भी कहा कि केस को अगले हफ्ते रखा जाए।
इसी क्रम में उन्होंने (CJI Suryakant) हंसते हुए टिप्पणी की कि इलाहाबाद है भाई, एक हफ्ता तो लग जाएगा भांग का नशा उतारने में। अदालत में यह टिप्पणी हल्के-फुल्के माहौल में की गई थी और इसका किसी न्यायिक आदेश से कोई संबंध नहीं था।
सोशल मीडिया पर क्लिप वायरल
वहीं चीफ जस्टिस (CJI Suryakant) की यह टिप्पणी अदालत की औपचारिक कार्यवाही का हिस्सा नहीं थी, बल्कि तारीख तय करते समय सामान्य बातचीत के दौरान कही गई थी। बावजूद इसके, इसका वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। लोग इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और मजाकिया अंदाज में की गई इस बात को अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं।
आपको बताते चलें कि, अदालतों में सुनवाई के दौरान कभी-कभी इस तरह की हल्की टिप्पणियां सुनने को मिल जाती हैं। यह पहली बार नहीं है जब किसी जज की टिप्पणी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हो। हालांकि स्पष्ट है कि ऐसी टिप्पणियों का केस के कानूनी पहलुओं पर कोई असर नहीं पड़ता है। संबंधित मामला अभी भी अदालत में लंबित है और अगली सुनवाई होली की छुट्टियों के बाद ही होगी।
भांग और इलाहाबाद की परंपरा
दरअसल उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में, खासकर काशी और इलाहाबाद में, होली के अवसर पर भांग का विशेष महत्व माना जाता है। वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत लोग होली के दिन भांग का सेवन करते हैं और उत्सव को पूरे उल्लास के साथ मनाते हैं। यही सांस्कृतिक संदर्भ चीफ जस्टिस की टिप्पणी में झलकता है।
दरअसल, CJI Suryakant की यह टिप्पणी स्थानीय परंपरा की ओर इशारा करते हुए मजाक में कही गई थी। लेकिन सोशल मीडिया के दौर में इस तरह के बयान तुरंत चर्चा का विषय बन जाते हैं। फिलहाल मामला न्यायिक प्रक्रिया में है और अगली सुनवाई होली की छुट्टियों के बाद निर्धारित की जाएगी।
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