ये है Fatty Liver से लड़ने का आयुर्वेदिक तरीका

Sandesh Wahak Digital Desk: आज की व्यस्त जीवनशैली में लोग अपने खानपान पर विशेष ध्यान नहीं दे पाते, जिसका असर सीधे सेहत पर पड़ता है। इसी कारण कई बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, जिनमें फैटी लिवर (Fatty Liver) भी शामिल है। पहले यह समस्या मुख्य रूप से शराब का अधिक सेवन करने वालों में देखी जाती थी, लेकिन अब यह उन लोगों में भी आम हो गई है जो शराब नहीं पीते। ऐसे में फैटी लिवर को मजबूत बनाने के लिए आयुर्वेदिक उपाय अपनाए जा सकते हैं, जिनमें न तो साइड इफेक्ट का खतरा होता है और न ही सर्जरी की जरूरत पड़ती है।

क्या है Fatty Liver की समस्या

दरअसल फैटी लिवर (Fatty Liver) की समस्या आजकल किसी को भी हो सकती है। यह बीमारी लिवर में अतिरिक्त वसा के जमा होने के कारण होती है। सामान्य रूप से हर व्यक्ति के लिवर में थोड़ी मात्रा में वसा मौजूद रहती है, जो स्वाभाविक है। लेकिन जब यह स्तर 10 प्रतिशत से अधिक हो जाता है, तब यह कई स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है।

वहीं फैटी लिवर (Fatty Liver) मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। अल्कोहलिक फैटी लिवर उन लोगों में पाया जाता है जो अत्यधिक शराब का सेवन करते हैं। वहीं नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर यानी एनएएफएलडी उन लोगों को हो सकता है जिनका वजन अधिक है, खानपान असंतुलित है या जिन्हें हाई कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज की समस्या है।

लक्षण जो संकेत देते हैं खतरे की ओर

दरअसल फैटी लिवर (Fatty Liver) के शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन समय के साथ समस्या बढ़ने पर संकेत सामने आने लगते हैं। व्यक्ति को थकान महसूस होने लगती है और पेट के दाहिनी ओर भारीपन का अहसास हो सकता है। भूख कम लगना, पेट में सूजन, मोटापा, चेहरे और आंखों में पीलापन जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। यदि समय रहते इलाज न किया जाए तो यह समस्या लिवर फेलियर या लिवर सिरोसिस का रूप ले सकती है।

आयुर्वेदिक उपाय जो लिवर को दें मजबूती

यहां फैटी लिवर (Fatty Liver) को नियंत्रित करने के लिए आयुर्वेद में कई प्रभावी उपाय बताए गए हैं। त्रिफला का सेवन शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में सहायक माना जाता है और इससे पाचन तंत्र बेहतर होता है। रात में भोजन के बाद गुनगुने पानी के साथ इसका सेवन लाभकारी बताया जाता है।

भृंगराज को आयुर्वेद में लिवर टॉनिक के रूप में स्वीकार किया गया है। यह लिवर में जमा अतिरिक्त वसा को कम करने और कोशिकाओं को सक्रिय बनाने में मदद करता है। कालमेघ, जिसका स्वाद कड़वा होता है, फैटी लिवर के मरीजों के लिए लाभकारी माना जाता है।

गिलोय को इम्युनिटी बूस्टर के रूप में जाना जाता है, लेकिन यह लिवर की सूजन कम करने और उसे मजबूत बनाने में भी सहायक है। सुबह खाली पेट एलोवेरा जूस का सेवन लिवर टॉनिक की तरह काम करता है और पाचन तंत्र को भी मजबूती देता है।

खानपान में रखें विशेष सावधानी

आपको बताते चलें कि फैटी लिवर (Fatty Liver) की समस्या में आहार का विशेष महत्व होता है। हरी और ताजी पत्तेदार सब्जियां, दलिया और ओट्स जैसे हल्के और पौष्टिक भोजन का सेवन फायदेमंद है। पपीता और सेब जैसे ताजे फल लाभकारी माने जाते हैं। हल्का गुनगुना पानी पीना भी उपयोगी है।

वहीं ज्यादा तेल मसाले वाले भोजन से परहेज करना चाहिए। फास्ट फूड और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। यदि आहार और विहार संतुलित रखा जाए तो शुरुआती अवस्था में बिना दवा या सर्जरी के भी फैटी लिवर (Fatty Liver) की समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है।

 

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