अब्बास अंसारी की बढ़ीं मुश्किलें: इस मामले में कोर्ट ने तय किए आरोप, 4 फरवरी को अगली सुनवाई
Sandesh Wahak Digital Desk: बाहुबली मुख्तार अंसारी के बेटे और मऊ से विधायक अब्बास अंसारी की कानूनी उलझनें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के एक मामले में कोर्ट ने अब्बास अंसारी समेत पांच आरोपियों के खिलाफ आरोप (Charges) तय कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला साल 2022 के विधानसभा चुनाव प्रचार से जुड़ा है। 12 फरवरी 2022 को मऊ के दक्षिणटोला थाने में चुनाव आयोग की शिकायत पर एक मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप था कि अब्बास अंसारी ने चुनाव प्रचार के दौरान निर्धारित सीमा से कहीं अधिक वाहनों का काफिला निकाला था, जो सीधे तौर पर आचार संहिता का उल्लंघन था। तत्कालीन थानाध्यक्ष पंकज कुमार सिंह ने इस मामले में अब्बास अंसारी, शाहिद लारी, साकिब लारी, इसराइल अंसारी और रमेश राम को नामजद किया था।
कोर्ट की कार्यवाही और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
बुधवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) डॉ. कृष्ण प्रताप सिंह की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई। अब्बास की पेशी को देखते हुए कचहरी परिसर में भारी पुलिस बल तैनात रहा। हर आने-जाने वाले की सघन तलाशी ली गई। कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर धारा 133 (आचार संहिता उल्लंघन) के तहत आरोप तय कर दिए हैं। हालांकि, अब्बास के वकील दरोगा सिंह के मुताबिक, कोर्ट ने मूल एफआईआर में लगी तीन धाराओं में से दो को हटा दिया है। अब इस मामले में गवाही और साक्ष्यों की प्रस्तुति के लिए 4 फरवरी की तिथि निर्धारित की गई है।
न्यायपालिका पर भरोसा है
अदालत से बाहर निकलते वक्त जब मीडिया ने अब्बास अंसारी से सवाल पूछने की कोशिश की, तो उन्होंने विस्तार से बात करने से इनकार कर दिया। उन्होंने बस इतना कहा कि उन्हें देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वे कानून का सम्मान करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट से मिली थी राहत
गौरतलब है कि हाल ही में 13 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने अब्बास अंसारी को बड़ी राहत दी थी। शीर्ष अदालत ने गैंगस्टर एक्ट के एक मामले में उनकी पूर्ण जमानत याचिका को मंजूर कर लिया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने माना था कि अब्बास लंबे समय से अंतरिम जमानत पर बाहर हैं और उन्होंने अपनी आजादी का दुरुपयोग नहीं किया है। लेकिन अब मऊ की स्थानीय अदालत में आरोप तय होने से उनकी विधायी छवि और कानूनी लड़ाई में नया मोड़ आ गया है।

