सच्ची राष्ट्रसेवा है भारतीय मूल्यों पर शिक्षा: ले. जनरल योगेंद्र डिमरी
Sandesh Wahak Digital Desk: महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद (एम.पी.ई.सी.) के संस्थापक-सप्ताह समारोह 2025 का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.) मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
ले. जनरल डिमरी ने अपने संबोधन में कहा कि अंग्रेजी शासन के दौरान भारतीय मूल्यों और संस्कारों पर आधारित शिक्षण संस्थान की स्थापना करना ही सच्ची राष्ट्रसेवा है। उन्होंने कहा कि 1932 में गोरखपुर में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की नींव रखना, 1916 में स्थापित काशी हिंदू विश्वविद्यालय की तरह, भारतीयता और राष्ट्र की सच्ची सेवा थी, जब देश में अंग्रेजियत का बोलबाला था। उन्होंने संस्थापक महंत दिग्विजय नाथ, राष्ट्र संत महंत अवेद्यनाथ और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित सभी शिक्षकों का राष्ट्रसेवा के इस संकल्प को सफल बनाने के लिए आभार व्यक्त किया।

देशभक्ति की नई परिभाषा
ले. जनरल डिमरी ने छात्र-छात्राओं को देशभक्ति की एक व्यापक परिभाषा देते हुए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि देशभक्ति केवल सीमा पर साहस दिखाना ही नहीं, बल्कि ईमानदारी से कर्तव्य पालन करना, पर्यावरण संरक्षण, लोक कल्याण और समाज का एक अच्छा नागरिक बनना भी वास्तविक देशभक्ति है। उन्होंने कहा कि सेना भी ऐसे युवाओं को चुनती है जो अनुशासन, समर्पण और कर्तव्यपालन को सर्वोपरि मानते हैं, क्योंकि अनुशासन ही सफलता की सीढ़ी है।

ले. जनरल डिमरी ने छात्रों को महाराणा प्रताप के अनुकरणीय जीवन से प्रेरणा लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप ने अकेले ही शक्तिशाली मुगल साम्राज्य की अवज्ञा करके आत्मबलिदान, त्याग और समर्पण के मूल्यों की अमर गाथा प्रस्तुत की। उन्होंने छात्रों को सफलता के लिए अनुशासन, साहस, समर्पण, समानता और प्रतिबद्धता के मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

तकनीक और चरित्र का महत्व
अपने संबोधन के अंत में, उन्होंने तेजी से बदल रही तकनीक, एआई (AI) और रोबोटिक्स के प्रति छात्रों को सजग रहने को कहा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में एक मजबूत चरित्र और सही तकनीक की समझ ही सफलता दिलाएगी।
उन्होंने भगवद् गीता के श्लोक ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’ का उल्लेख करते हुए परिणाम की चिंता किए बिना कर्तव्यपालन को अनुकरणीय बताया। उन्होंने यह भी कहा, “विजय मैदान में नहीं मन पर होती है, शक्ति हथियार में नहीं संस्कार में होती है।”

