ISIS-JK से जुड़े होने के आरोप में 8 साल जेल में रहे 2 युवक, सबूतों के अभाव में हुए बरी
Sandesh Wahak Digital Desk: राजधानी दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने एक अहम फैसले में साल 2018 में गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों को बरी कर दिया है। इन दोनों युवकों पर ISIS-JK से जुड़े होने का आरोप लगाया गया था, लेकिन अदालत में उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया जा सका।
सबूत के अभाव में मिली राहत
कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि आरोपी वास्तव में ISIS से जुड़े हुए थे। अदालत ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि केवल आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को जेल में नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसके लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य होना जरूरी है। ऐसे में दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
जस्टिस अमित बंसल ने सुनाया फैसला
इस मामले में फैसला सुनाते हुए जस्टिस अमित बंसल ने जमशेद ज़हूर पॉल और परवेज़ राशिद लोन को गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और शस्त्र अधिनियम के तहत लगे सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह भी साबित नहीं कर सका कि 6 सितंबर 2018 से पहले दोनों आरोपी ISIS-JK के सदस्य थे।
क्या थे आरोप और पुलिस का दावा
जमशेद ज़हूर पॉल और परवेज़ राशिद लोन पर UAPA के तहत गंभीर आरोप लगाए गए थे। पुलिस का दावा था कि दोनों आरोपी ISIS-JK के लिए काम कर रहे थे और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की तैयारी में थे। गिरफ्तारी के दौरान उनके बैग से पिस्तौल और कारतूस मिलने की बात भी कही गई थी। साथ ही यह भी आरोप था कि वे कश्मीर में किसी बड़े हमले की योजना बना रहे थे।
मामले से जुड़े अन्य पहलू
इस मामले में एक आरोपी की पहले ही मौत हो चुकी है, जबकि एक अन्य आरोपी अब भी फरार बताया जा रहा है। अदालत के इस फैसले के बाद फरार आरोपी को भी राहत मिलने की बात कही जा रही है।
न्यायिक प्रक्रिया पर कोर्ट की टिप्पणी
कोर्ट के फैसले ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए मजबूत साक्ष्य जरूरी होते हैं। केवल संदेह या आरोप के आधार पर किसी को सजा नहीं दी जा सकती, और कानून के तहत हर आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार है।
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