उन्नाव केस: कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका, सजा निलंबन की अर्जी खारिज

Sandesh Wahak Digital Desk: उन्नाव की चर्चित बलात्कार पीड़िता के पिता की कस्टडी में हुई मौत के मामले में दोषी पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंगर की सजा निलंबन (Suspension of Sentence) की अर्जी को पूरी तरह खारिज कर दिया है। यह फैसला सेंगर के लिए एक बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है।

सेहत का हवाला देकर मांगी थी रिहाई

कुलदीप सिंह सेंगर ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि वह लंबे समय से जेल में बंद हैं और उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही है। सेंगर की ओर से दावा किया गया था कि वह डायबिटीज और मोतियाबिंद जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं, जिसके इलाज के लिए उन्हें तिहाड़ जेल से बाहर एम्स (AIIMS) जाने की जरूरत है। इसी आधार पर उन्होंने 10 साल की सजा को निलंबित करने की मांग की थी।

CBI और पीड़िता ने किया कड़ा विरोध

सेंगर की इस अर्जी पर सीबीआई और पीड़िता के पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। सीबीआई ने कोर्ट में दलील दी कि यह मामला बेहद गंभीर है, जिसमें अपहरण, मारपीट और पुलिस हिरासत में मौत जैसे संगीन अपराध शामिल हैं। जांच एजेंसी ने कहा कि सेंगर ने पीड़िता के परिवार को डराने और चुप कराने के लिए साजिश रची थी। पीड़िता की ओर से भी कहा गया कि ऐसे प्रभावशाली अपराधी को राहत देना न्याय के साथ खिलवाड़ होगा।

अदालत ने क्या कहा?

जस्टिस रविंदर दुडेजा की बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मंगलवार को अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता और सेंगर के खिलाफ लगे आरोपों को देखते हुए उन्हें किसी भी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया। हालांकि, कस्टोडियल डेथ मामले में उनकी सजा के खिलाफ मुख्य अपील अभी भी लंबित है, जिस पर आगे सुनवाई होगी।

मुश्किलें और भी हैं…

गौरतलब है कि कुलदीप सिंह सेंगर पहले से ही उन्नाव बलात्कार मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। पिछले महीने ही सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार केस में उन्हें मिली सजा निलंबन की राहत पर भी रोक लगा दी थी। अब हाईकोर्ट के इस नए आदेश ने सेंगर की जेल से बाहर आने की उम्मीदों पर फिलहाल पानी फेर दिया है।

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