Unnao News: पशु चिकित्सालयों में लाखों का घपला! जांच समिति की निष्क्रियता पर उठे सवाल
Unnao News: जिले में पशु चिकित्सालयों और पशु सेवा केंद्रों के सुदृढ़ीकरण के नाम पर जारी किए गए बजट में गड़बड़ी की परतें धीरे-धीरे खुलने लगी हैं। शासन द्वारा मरम्मत, रंगाई-पुताई और सामग्री खरीद के लिए दिए गए 13.80 लाख रुपये के खर्च में भारी अनियमितताओं के आरोप लगे थे । जिस पर विशेष सचिव पशु चिकित्सा देवेंद्र पांडेय ने जांच के निर्देश दिए थे, लेकिन जिला अधिकारी द्वारा गठित जांच समिति की निष्क्रियता ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है।
बीती मार्च माह में शासन द्वारा प्रत्येक पशु चिकित्सालय के लिए ₹1 लाख और पशु सेवा केंद्रों के लिए ₹90 हजार रुपये का बजट जारी किया गया था। इस बजट से औरास, सुमेरपुर, पुरवा, सिकंदरपुर कर्ण, सिकंदरपुर सरोसी, परियर, असोहा, हिलौली व नवाबगंज में कुल 14 स्थानों पर मरम्मत कार्य और रंगाई-पुताई कराई गई। इसके अतिरिक्त सुमेरपुर के भगवंतनगर और बिछिया के कोरारी कला पशु सेवा केंद्रों पर भी काम हुआ। काम तो दिखाए गए, पर शिकायतों का अंबार लग गया। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर सिर्फ कागजों में कार्य दर्शाया गया है।

डीएम ने गठित की थी जांच समिति
कार्यालय उपयोग की सामग्री जैसे तौलिया, झाड़ू आदि की खरीद में भी घपला किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष सचिव ने डीएम गौरांग राठी को पत्र भेजकर मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. महावीर सिंह सहित अन्य जिम्मेदारों की जांच कर रिपोर्ट मांगी थी। डीएम ने जांच के लिए एक समिति का गठन तो किया था, लेकिन समय बीतने के साथ यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। न जांच आगे बढ़ी और न ही रिपोर्ट शासन को भेजी गई। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि कहीं न कहीं गड़बड़ी में फंसे अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
इस बीच जब ‘संदेश वाहक’ संवाददाता ने जांच समिति के सदस्य व जिला विकास अधिकारी देव कुमार चतुर्वेदी से बात की, तो उन्होंने कहा, “जांच प्रक्रिया चल रही है और एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट शासन को सौंप दी जाएगी।” हालांकि, यह बयान पहले भी दिए जा चुके हैं, लेकिन कोई ठोस कार्यवाही आज तक नहीं हुई। स्थानीय लोगों में इस मामले को लेकर गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि सरकारी धन का इस तरह दुरुपयोग न केवल भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है, बल्कि जरूरतमंद मवेशियों की चिकित्सा व्यवस्था पर भी असर डालता है। अब देखना यह है कि शासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्यवाही होती है।
रिपोर्ट: मो. आतिफ (अनम)
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