यूपी: बरेली सिटी मजिस्ट्रेट का सरकार पर गंभीर आरोप और इस्तीफा, सरकार ने किया सस्पेंड
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारे में इस समय हड़कंप मचा हुआ है। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने गणतंत्र दिवस के मौके पर न केवल अपने पद से इस्तीफा दिया, बल्कि सरकार और सिस्टम पर ऐसे गंभीर आरोप लगाए हैं जिसने पूरी ब्यूरोक्रेसी को हिला कर रख दिया है। जवाबी कार्रवाई में प्रदेश सरकार ने उन्हें निलंबित (Suspend) कर दिया है।
क्यों दिया इस्तीफा? माघ मेले की घटना बनी वजह
अलंकार अग्निहोत्री ने राज्यपाल को भेजे अपने 7 पन्नों के इस्तीफे में लिखा है कि वह प्रयागराज माघ मेले में हुई एक घटना से बेहद आहत हैं। उन्होंने दावा किया कि मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों और बटुक ब्राह्मणों के साथ स्थानीय प्रशासन ने मारपीट की। उन्होंने पत्र में लिखा, “वृद्ध आचार्यों को पीटा गया और एक बटुक ब्राह्मण की शिखा (चोटी) पकड़कर घसीटा गया। मैं स्वयं ब्राह्मण हूं और साधु-संतों का यह अपमान मेरी आत्मा को कंपा देता है।”
सरकार पर तीखा प्रहार: ‘जनतंत्र नहीं, भ्रमतंत्र है’
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे में सरकार के खिलाफ बेहद सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने लिखा “देश में अब जनतंत्र या गणतंत्र नहीं, बल्कि भ्रमतंत्र है। यह देशी सरकार नहीं, बल्कि विदेशी जनता पार्टी की सरकार है।”
उन्होंने यूजीसी (UGC) के नए कानून का भी कड़ा विरोध किया और इसे ‘काला कानून’ करार देते हुए सोशल मीडिया पर हाथ में पोस्टर लिए अपनी तस्वीर भी साझा की।
‘डीएम आवास पर 45 मिनट तक बंधक रहा’
इस्तीफे के बाद बरेली के डीएम आवास पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट ने बाहर निकलकर एक और चौंकाने वाला आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि डीएम ने उन्हें बातचीत के लिए बुलाया था, लेकिन उन्हें वहां 45 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि लखनऊ के एक बड़े अधिकारी ने फोन पर उन्हें अपशब्द कहे, जिसे डीएम ने स्पीकर ऑन करके सुनाया।
सरकार की बड़ी कार्रवाई: निलंबन और अटैचमेंट
प्रशासनिक अनुशासन भंग करने और सरकार विरोधी बयानों के चलते यूपी सरकार ने तुरंत कार्रवाई की:
सस्पेंशन: अलंकार अग्निहोत्री को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
अटैचमेंट: जांच पूरी होने तक उन्हें शामली कलेक्टर ऑफिस से अटैच किया गया है।
जांच: पूरे मामले की जांच बरेली के मंडलायुक्त (Commissioner) को सौंपी गई है।
कर्मचारियों का समर्थन और आंदोलन की चेतावनी
इस बीच, बरेली कॉलेज की कर्मचारी कल्याण सेवा समिति ने सिटी मजिस्ट्रेट का समर्थन किया है। समिति के अध्यक्ष जितेंद्र मिश्रा ने कहा कि अगर सरकार ने शंकराचार्य के अपमान पर माफी नहीं मांगी और यूजीसी कानून वापस नहीं लिया, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

