UP Construction Department: चहेतों के लिए पीडब्ल्यूडी में करोड़ों के सड़क ठेकों का ‘मैनेजमेंट’
वित्तीय वर्ष खत्म होने से 23 दिन पहले प्रदेश भर में करीबी ठेकेदारों के लिए टेंडरों को निरस्त करने का खेल
Sandesh Wahak Digital Desk: वर्तमान वित्तीय वर्ष के समाप्त होने में महज 23 दिन का समय शेष है। इस दौरान प्रदेश भर में सैकड़ों करोड़ के सडक़ों के टेंडर चहेते ठेकेदारों को मनमाने तरीके से देने का खेल लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में मानो चरम पर है। ख़ास बात ये है कि चहेते ठेकेदारों को ठेके देने में रूकावट आयी तो इंजीनियरों को टेंडर निरस्त करने से तनिक भी परहेज नहीं है।
पीडब्ल्यूडी में इस अंदाज में सडक़ों के ठेके मैनेज करने का खेल हालांकि पुराना है। सीएम योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति फिलहाल पीडब्ल्यूडी इंजीनियरों के ठेंगे पर है।
72 घंटे बाद वित्तीय बिड खोले जाने का नियम
ताजा मामला लखनऊ से सटे अमेठी का है। अमेठी विधान सभा क्षेत्र में 69.22 किमी लंबाई के कुल 53 संपर्क मार्ग के नवीनीकरण के लिए छह करोड़ 92 लाख 15 हजार आवंटित किए गए हैं। बीती 16 से 24 फरवरी तक टेंडर प्रक्रिया कराई गई। 24 फरवरी तक आवेदन की प्रक्रिया पूरी हो गई। ज्यादातर सडक़ों के नवीनीकरण में अधिक आवेदन आ गए।
ऐसे में अधिकारी जिन्हें सडक़ों के नवीनीकरण का टेंडर देना चाहते थे, उन्हें कंपटीशन के चलते नवीनीकरण का कार्य मिलने की संभावना नहीं थी। अधिकारियों ने निर्धारित समय पर आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी टेक्निकल बिड का मूल्यांकन नहीं किया। जबकि टेंडर प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद उसी दिन टेक्निकल बिड व इसके 72 घंटे बाद वित्तीय बिड खोले जाने का नियम हैं।
चहेते ठेकेदारों को नवीनीकरण का कार्य न मिलता देख अधिकारियों ने टेंडर निरस्त कर दिया है। सडक़ों के ठेकों में मैनेजमेंट के आरोप सुल्तानपुर में भी लग रहे हैं। सुल्तानपुर में ठेकेदारों ने पीडब्ल्यूडी पर टेंडर रद्द करने और फर्जी मुकदमों में फंसाने की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है। ठेकेदारों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराने के साथ ही मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजा है। मामला फरवरी में जयसिंहपुर तहसील क्षेत्र के कार्यों के लिए जारी टेंडरों से जुड़ा है। टेक्निकल बिड खुलने के बाद, उन ठेकेदारों की निविदाएं नियमों का हवाला देकर रद्द कर दी गईं जो कथित तौर पर ‘माननीयों’ (राजनीतिक हस्तियों) के खेमे से संबंधित नहीं थे।

पिछले साल रद्द हुए थे 300 करोड़ के 11 टेंडर
पिछले वर्ष गोंडा-बलरामपुर जिले में सडक़ निर्माण को लेकर हुए टेंडर प्रक्रिया पर खुद केंद्रीय मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने शिकायत की थी। 300 करोड़ के 11 टेंडर रद्द किये गए थे। टेंडर प्रक्रिया में और फर्मे इसलिए शामिल नहीं हो सकी थी, क्योंकि उनके मालिकों को डराया धमकाया गया था। इसके बाद उन्होंने शासन को पत्र लिखकर टेंडर रद्द करने की मांग की।
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