UP Electricity Department: संविदा कर्मियों की छंटनी पर नियामक आयोग सख्त, 7 दिन में तलब की रिपोर्ट

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग में संविदा कर्मचारियों (Outsourced Employees) को हटाए जाने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद की शिकायत पर कड़ा संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंधन से सात दिन के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है।

विवाद का मुख्य कारण

मध्यांचल विद्युत वितरण निगम द्वारा हाल ही में जनसुनवाई और फील्ड कार्य से जुड़े संविदा कर्मचारियों की छंटनी की गई है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि अनुभवी कर्मचारियों को हटाए जाने से प्रदेश की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था चरमरा रही है। इससे न केवल तकनीकी फॉल्ट ठीक करने में देरी हो रही है, बल्कि राजस्व का भी भारी नुकसान हो रहा है।

महत्वपूर्ण आंकड़े और वित्तीय पक्ष

बैठक और शिकायत के दौरान परिषद ने निगम के खर्चों पर भी सवाल उठाए। वित्तीय वर्ष 2024-25 में मध्यांचल निगम ने ‘कॉन्ट्रैक्ट मैनपावर’ (संविदा जनशक्ति) पर ₹417 करोड़ खर्च किए हैं। परिषद का तर्क है कि जब इतना भारी-भरकम बजट आवंटित है, तो फील्ड कर्मचारियों की छंटनी कर विद्युत व्यवस्था को संकट में क्यों डाला जा रहा है?

एस्मा (ESMA) लगाने की मांग

अवधेश कुमार वर्मा ने आरोप लगाया कि प्रबंधन के ऐसे मनमाने फैसले प्रदेश में बिजली कर्मचारियों की ‘हड़ताल’ जैसी परिस्थितियां पैदा कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि बिजली आपूर्ति बाधित करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर एस्मा (Essential Services Maintenance Act) लागू किया जाना चाहिए। बरेली समेत कई अन्य मंडलों के उद्योग संगठनों और उपभोक्ता प्रतिनिधियों ने भी इस छंटनी का विरोध कर परिषद के पक्ष का समर्थन किया है।

नियामक आयोग का निर्देश

नियामक आयोग ने बिजली निगम को आदेश दिया है कि वह एक सप्ताह के भीतर स्पष्ट करे कि किस आधार पर छंटनी की जा रही है और इसका बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।

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