Lucknow News: पैसा खर्च करने में गोंडा ने राजधानी लखनऊ को पछाड़ा, सरकारी रिपोर्ट में हुआ खुलासा
Lucknow News: केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की एक नई रिपोर्ट ने उत्तर प्रदेश के उपभोक्ता खर्च की आदतों को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (2022-23) के अनुसार, प्रति व्यक्ति मासिक खर्च के मामले में गोंडा जिले के लोग राजधानी लखनऊ से भी आगे निकल गए हैं।
रिपोर्ट में राज्य के विभिन्न जिलों में खर्च करने की आदतों में बड़ी असमानता और उल्लेखनीय वृद्धि पर प्रकाश डाला गया है।
शहरी क्षेत्रों में ख़र्च के मामले में शीर्ष 5 जिले (प्रति व्यक्ति मासिक औसत व्यय)
| स्थान | जिला | औसत मासिक खर्च (₹) |
| 1. | गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) | 9,705 रुपये |
| 2. | गोंडा | 8,133 रुपये |
| 3. | बागपत | 6,995 रुपये |
| 4. | लखनऊ | 6,622 रुपये |
| 5. | मुजफ्फरनगर | 6,081 रुपये |
आँकड़ों के मुताबिक, गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) में शहरी खर्च सबसे अधिक है, जबकि गोंडा 8,133 रुपये के साथ दूसरे स्थान पर है, जिसने लखनऊ (6,622 रुपये) को पीछे छोड़ दिया है।
ग्रामीण क्षेत्रों का हाल
ग्रामीण क्षेत्रों में भी खर्च की आदतें तेजी से बढ़ी हैं। ग्रामीण खर्च के मामले में श्रावस्ती (4,462 रुपये) सबसे आगे है।
| सबसे ज्यादा खर्च वाले ग्रामीण जिले | औसत मासिक खर्च (₹) | सबसे कम खर्च वाले ग्रामीण जिले | औसत मासिक खर्च (₹) |
| श्रावस्ती | 4,462 रुपये | सोनभद्र | 2,357 रुपये |
| गौतम बुद्ध नगर | 4,454 रुपये | चंदौली | 2,367 रुपये |
| बागपत | 4,347 रुपये | मिर्जापुर | 2,409 रुपये |
| मेरठ | 4,279 रुपये | गाजीपुर | 2,579 रुपये |
| गाजियाबाद | 4,044 रुपये | कन्नौज | 2,597 रुपये |
ये जिले हैं सबसे ‘कंजूस‘
सबसे कम औसत मासिक शहरी खर्च वाले जिलों में बलिया, अंबेडकर नगर और गाजीपुर शामिल हैं।
- बलिया: 2,581 रुपये
- अंबेडकर नगर: 2,653 रुपये
- गाजीपुर: 2,771 रुपये
राष्ट्रीय परिदृश्य और मुख्य निष्कर्ष
रिपोर्ट बताती है कि पिछले दस वर्षों में खर्च के आँकड़ों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
- राष्ट्रीय औसत: देश में प्रति व्यक्ति औसत मासिक उपभोग व्यय ग्रामीण क्षेत्रों में 3,773 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 6,459 रुपये है।
- अंतर हुआ कम: ग्रामीण क्षेत्रों में खर्च की वृद्धि दर शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक रही है। 2022-23 में ग्रामीण और शहरी उपभोग व्यय के बीच का अंतर लगभग 71 प्रतिशत है, जो 2011-12 की तुलना में काफी कम है।
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