यूपी मिशन-2027: भाजपा ने चला ‘साध्वी’ दांव, OBC और निषाद समाज को बड़ा संदेश

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में पूर्व केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) का अध्यक्ष नियुक्त कर पार्टी ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। यह नियुक्ति विपक्ष के ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नैरेटिव के खिलाफ भाजपा की एक मजबूत जवाबी रणनीति मानी जा रही है।

साध्वी निरंजन ज्योति: हमीरपुर से दिल्ली तक का सफर

साध्वी निरंजन ज्योति बुंदेलखंड के हमीरपुर से अपनी सियासी पारी शुरू करने वाली प्रखर भगवाधारी नेता हैं। वे 2014 और 2019 में फतेहपुर से सांसद रह चुकी हैं और मोदी कैबिनेट में राज्यमंत्री के रूप में कार्य किया है। वे निषाद समाज से आती हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में हार के बावजूद पार्टी ने उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपकर यह स्पष्ट किया है कि अनुभवी पिछड़ा वर्ग के नेताओं की महत्ता कम नहीं हुई है।

नियुक्ति के पीछे के 3 बड़े राजनीतिक संदेश

  1. पिछड़ों के बीच चुनावी ‘ज्योति’ जलाने की जुगत

भाजपा ने संगठन और आयोगों में ओबीसी (OBC) और दलित वर्ग की उन जातियों को प्रतिनिधित्व देना शुरू किया है जो अब तक मुख्यधारा की सियासत में गुमनाम थीं। साध्वी की नियुक्ति से यूपी के विशाल निषाद और मल्लाह वोट बैंक को सीधा संदेश दिया गया है।

  1. सहयोगियों को स्पष्ट संकेत

हाल ही में पंकज चौधरी (कुर्मी समाज) को प्रदेश अध्यक्ष बनाने और अब साध्वी निरंजन ज्योति की नियुक्ति से भाजपा ने अपने सहयोगी दलों (विशेषकर निषाद पार्टी और अपना दल) को यह जता दिया है कि वह अपनी स्वतंत्र पिछड़ा केंद्रित रणनीति पर काम कर रही है और किसी भी प्रकार के अतिरिक्त दबाव में नहीं आएगी।

  1. 2022 की गलतियों से सीख

2022 के चुनाव से ठीक पहले कई पिछड़े नेता भाजपा छोड़कर सपा में शामिल हो गए थे। इस बार पार्टी ‘रिस्क’ कम करने के लिए खुद ही पिछड़ी जातियों के कद्दावर चेहरों को संवैधानिक और संगठनात्मक पदों पर स्थापित कर रही है। इससे पूर्व राजेश वर्मा (कुर्मी) को भी चुनाव हारने के बाद राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष बनाकर इसी रणनीति को पुख्ता किया गया था।

साध्वी निरंजन ज्योति की नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि यूपी के तराई और बुंदेलखंड क्षेत्रों में भाजपा की पकड़ मजबूत करने का एक सुनियोजित ‘मास्टरस्ट्रोक’ है।

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