15 करोड़ की फिरौती मांगकर बिल्डरों को फंसाने वाले गिरोह का खुलासा, UP STF ने 3 शातिर बदमाशों को दबोचा
Sandesh Wahak Digital Desk: स्पेशल टास्क फ़ोर्स (STF), उत्तर प्रदेश को एक बड़ी सफलता मिली है। STF ने एनसीआर क्षेत्र (गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर) में उद्यमियों (बिल्डरों) के ख़िलाफ़ झूठी शिकायतें करके और उन्हें मीडिया में प्रसारित करवाकर रंगदारी वसूलने वाले एक शातिर अंतर्राज्यीय गिरोह के 03 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है।
15 करोड़ की फिरौती मांगने का था मामला
एसटीएफ नोएडा यूनिट लंबे समय से इस आपराधिक गैंग के संबंध में सूचनाएं एकत्र कर रही थी। इस गिरोह का तरीका था कि वह उद्यमियों की छवि धूमिल कर और उन्हें सरकारी जाँच में उलझाकर अवैध वसूली करते थे। गिरफ्तार अभियुक्तों में मुख्य साजिशकर्ता अंकुर गुप्ता (निवासी दरियागंज, दिल्ली) है। उसके साथ हरनाम धवन और नरेन्द्र धवन (दोनों निवासी शास्त्रीनगर, दिल्ली) को भी गिरफ्तार किया गया है।
एसटीएफ को पुख़्ता सूचना मिली थी कि अंकुर गुप्ता और उसके साथियों ने एक बिल्डर के ख़िलाफ़ कई विभागों में शिकायतें कीं और समाचार पत्रों में ख़बर छपवाने की धमकी देकर पहले ₹15 करोड़ की फिरौती माँगी। बिल्डर द्वारा असमर्थता जताने पर, फिरौती की रकम घटाकर ₹05 करोड़ कर दी गई, जिसमें से कुछ रकम उन्होंने वसूल भी ली थी।
STF नोएडा की टीम ने पूछताछ के बाद तीनों अभियुक्तों को 30 सितंबर 2025 को गौतमबुद्धनगर के सूरजपुर थाना क्षेत्र स्थित एसटीएफ कार्यालय से गिरफ्तार किया।
ऐसे चलता था रंगदारी का सिंडीकेट
पूछताछ में मुख्य आरोपी अंकुर गुप्ता ने अपने अपराध की पूरी कार्यप्रणाली का खुलासा किया। अंकुर गुप्ता, जो पहले कपड़े की दुकान चलाता था, ने बैंक लोन न चुका पाने पर विभिन्न विभागों में शिकायतें करना शुरू किया। इस अनुभव से उसे समझ आया कि झूठी शिकायत करके किसी भी व्यक्ति को आसानी से परेशान किया जा सकता है, जिसके बदले में वह कुछ पैसे दे देता है।
इसके बाद उसने दिल्ली और एनसीआर के उद्यमियों और बिल्डरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। वह ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स, विकास प्राधिकरण और ईओडब्ल्यू जैसे विभागों में झूठी शिकायतें करने लगा, ताकि उद्यमी अपनी छवि बचाने के लिए उसे धन दे दें।
अपने अवैध कार्य को और विस्तृत करने के लिए अंकुर गुप्ता ने दिल्ली के फ़्रीलांसर और छोटे समाचार पत्रों/यू-ट्यूब चैनल के पत्रकारों को लालच देकर अपने साथ मिला लिया। गिरफ्तार नरेन्द्र धवन और उसका पुत्र हरनाम धवन इसी सिंडीकेट का हिस्सा थे, जो झूठी शिकायतों के आधार पर ख़बरें प्रकाशित करते थे, जिससे उद्यमी डरकर रंगदारी देने को मजबूर हो जाते थे। उनके इस काम से कई बिल्डरों के प्रोजेक्ट पूरे होने में देरी हुई, जिससे सैकड़ों खरीदारों को भी नुकसान उठाना पड़ा।
ये बिल्डर थे गिरोह के निशाने पर
गिरफ्तार अभियुक्तों ने पूछताछ में बताया कि वर्तमान में उनके निशाने पर करोलबाग स्थित यूनिटी ग्रुप द्वारा बनाए जा रहे ‘द एमरिल्स’, गाजियाबाद के शिप्रा एवं साया बिल्डर, इंदिरापुरम के हारमनी बिल्डर और ग्रेटर नोएडा के केशवकुंज प्रोजेक्ट थे। ये गिरोह इनके ख़िलाफ़ अनर्गल शिकायतें विभिन्न सरकारी एजेंसियों में कर रहा था।
बरामदगी और दर्ज मामले
- पुलिस ने अभियुक्तों के कब्जे से 04 मोबाइल फोन, ₹62,720/- नगद, 01 अमेरिकी डॉलर, 01 फ़र्ज़ी आधार कार्ड और 17 डाक रसीदें बरामद की हैं।
- गिरफ्तार अभियुक्तों के ख़िलाफ़ थाना इंदिरापुरम, जनपद गाजियाबाद में मु0अ0सं0 1085/25 सहित कई धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया है।
- यह भी पता चला है कि अभियुक्त हरनाम धवन वर्ष 2021 में दिल्ली में धारा 376 भादवि के अभियोग में जेल जा चुका है।
- एसटीएफ इस गिरोह के अन्य सदस्यों और पीड़ित व्यक्तियों की जानकारियाँ एकत्र कर रही है, जिन्हें जाँच में शामिल किया जाएगा।
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