UP News: सपा शासन के भ्रष्टाचार पर कुंडली मारे बैठी नौकरशाही
आखिर कहां है लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे के भूमि अधिग्रहण घोटाले पर ईओडब्ल्यू की जांच रिपोर्ट?
Sandesh Wahak Digital Desk: दस जिलों में भूमि अधिग्रहण को लेकर सैकड़ों करोड़ के खेल की आशंका आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान थी। नतीजतन योगी राज में पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार के इस ड्रीम प्रोजेक्ट की जांच ईओडब्ल्यू को सौंपी गयी।
एजेंसी की कानपुर इकाई जांच की मुखिया थी। इतने बड़े घोटाले की जांच में बड़े अफसरों की गर्दन फंसती देख पूरी रिपोर्ट ही मानो सात तालों के नीचे नौकरशाही ने दफन करा दी। ख़ास बात ये है कि सीएजी ने एक्सप्रेस-वे के निर्माण में करोड़ों के जिन भुगतानों में गड़बडिय़ां पकड़ी। उसकी जांच का भी कोई अता-पता आजतक नहीं है।

सीएजी ने करोड़ों की जिन अनियमितताओं को पकड़ा यूपीडा अफसरों ने उसकी नहीं कराई जांच
योगी सरकार के भीतर सपा शासन के कई बड़े घोटालों पर पर्दा डाला गया है। इसमें जेपीएनआईसी घोटाला भी शामिल है। इसी तर्ज पर एक्सप्रेस-वे घोटाले को दबाने के उच्चस्तरीय प्रयास भी जोरों पर हैं। सबसे अहम तथ्य है कि समाजवादी पार्टी के दौरान आये इस प्रोजेक्ट की बारीकियां चंद अफसर-नेता बखूबी जानते थे। जिनके इशारों पर भूमाफिया किस्म के बिल्डरों ने प्रोजेक्ट का भूमि अधिग्रहण होने से पहले ही किसानों से आने पौने दामों पर बेहिसाब जमीनें खरीदकर भारी मुआवजा सरकार से हासिल किया। बाकायदा एक्सप्रेसवे के सीमांकन से पहले ही राजस्व रिकार्ड में हेराफेरी को अंजाम दिया गया था। बाद में इन जमीनों को अधिक दर पर इन्ही भूमाफिया किस्म के बिल्डरों से खरीदा गया।

वहीं एक्सप्रेस-वे के किनारे के गांवों की जमीनों की खरीद फरोख्त में गड़बड़ियों के तार सिर्फ स्थानीय स्तर के अफसरों-राजस्व कर्मियों से ही नहीं जुड़े हैं बल्कि कई बड़े अफसर और सियासी शख्सियतें भी लाभांवित हुई हैं। तभी यूपीडा के अफसर जांच के दौरान ईओडब्ल्यू को दस्तावेज मुहैया नहीं करा रहे थे। कई रिमाइंडर भी भेजे गए थे।

कन्नौज में 3.65 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान, जांच आज तक नहीं, लखनऊ में भी खेल
सीएजी रिपोर्ट में दिया है कि कन्नौज में 3.65 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान किया गया। यूपीडा के अफसरों ने आज तक जांच नहीं कराई। नियमों के मुताबिक यूपीडा की मंजूरी बिना भूमि अधिग्रहण की अंतिम दर को मंजूरी नहीं मिल सकती थी। जुलाई 2014-2015 के दौरान कन्नौज के सात गांवों की जमीन की खरीद अनुमोदित दरों से अधिक दर पर हुई थी। सीमांकन की जानकारी नहीं होने के कारण किसानों ने कम दरों पर भूमि बेची।
कन्नौज में किए गए 88 में से 40 बैनामों में किसी सडक़ का उल्लेख नहीं था। लखनऊ की सरोजनी नगर तहसील में भी एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित चार गांवों की भूमि की खरीद में गड़बड़ी की आशंका है। एक मामला राजस्व परिषद के संज्ञान में आया है। जिसमें ग्राम समाज की भूमि पर वंचित समाज के लोगों का कब्जा दिखाकर मुआवजा हड़पा गया है। दो बड़े बिल्डरों ने भी लखनऊ और काकोरी में किसानों से सस्ती दरों पर भूमि खरीदी थी। जांच के बाद 70 सेल डीड की भूमि जब्त हो गयी।
Also Read: लखनऊ: सीएमएस प्रबंधन को करोड़ों का झटका, निर्माण से जुड़े विवाद में आया फैसला

