UP News: जेएस यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द, योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने शिक्षा के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए फिरोजाबाद के शिकोहाबाद स्थित जेएस विश्वविद्यालय (JS University) की मान्यता रद्द करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
क्यों गिरी जेएस यूनिवर्सिटी पर गाज?
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि इस विश्वविद्यालय के खिलाफ जांच में बेहद गंभीर और चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं।
नियमों को ताक पर रखकर बीपीएड (B.P.Ed) पाठ्यक्रम की फर्जी और बैकडेट में डिग्रियां जारी की गईं। इन डिग्रियों का इस्तेमाल राजस्थान की ‘शारीरिक शिक्षा अध्यापक भर्ती परीक्षा-2022’ में अवैध रूप से चयन के लिए किया गया था।
इस मामले में राजस्थान पुलिस की जांच के बाद विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और कुलसचिव की पहले ही गिरफ्तारी हो चुकी है। विवि के पास निर्धारित 40 एकड़ के बजाय केवल 35.637 एकड़ भूमि ही पाई गई। साथ ही, छात्रों का रिकॉर्ड उच्च शिक्षा परिषद को नियमित रूप से नहीं भेजा जा रहा था।
15 हजार छात्रों का क्या होगा?
सरकार ने विवि की मान्यता रद्द करने के साथ ही वहां पढ़ रहे करीब 15 हजार विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए विशेष इंतजाम किए है।
जेएस यूनिवर्सिटी के सभी प्रशासनिक और शैक्षणिक अभिलेख अब आगरा स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय को सौंपे जाएंगे। अब तक जारी की गई सभी डिग्रियों और अंकतालिकाओं की गहन जांच आगरा विश्वविद्यालय द्वारा की जाएगी, ताकि असली और फर्जी छात्रों की पहचान हो सके। विवि के संचालन और प्रशासनिक कार्यों को देखने के लिए तीन सदस्यीय अंतरिम समिति का गठन किया गया है।
छात्रों और अभिभावकों में खलबली
मान्यता रद्द होने की खबर मंगलवार देर शाम जैसे ही फैली, छात्रों और उनके अभिभावकों में हड़कंप मच गया। लोग भविष्य को लेकर चिंतित होकर एक-दूसरे को फोन करने लगे। हालांकि, विवि प्रबंधन और सरकारी सूत्रों ने साफ किया है कि वर्तमान में अध्ययनरत वास्तविक छात्रों का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित है और उनकी आगे की पढ़ाई व परीक्षाओं की जिम्मेदारी अब आगरा विश्वविद्यालय की होगी।
प्रबंधन का रुख
फिलहाल जेएस यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने कैबिनेट के इस फैसले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। सूत्रों के मुताबिक, प्रबंधन इस कानूनी झटके के बाद विशेषज्ञों से कानूनी राय लेने पर विचार कर रहा है।
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