कानपुर कांड: सिर्फ पीपीएस अफसरों तक आंच, आखिर आईपीएस पर किसका हाथ?
अखिलेश दुबे के संगठित गैंग का हिस्सा बने पुलिस अफसरों ने खपाई है काली कमाई, एक डिप्टी एसपी सौ करोड़ के मालिक
Sandesh Wahak Digital Desk: प्रदेश में आईएएस व आईपीएस के खिलाफ कार्रवाई होना टेढ़ी खीर है। इन शीर्ष अफसरों को जांचों में क्लीनचिट मिलने की रफ्तार भी बढ़ी है। जो पुलिस अफसर संगठित गिरोह बनाकर करोड़ों की अकूत सम्पत्तियां अर्जित करते हैं। उनको तो मानो सीएम का भी भय नहीं है। कुछ ऐसा ही कानपुर के अखिलेश दुबे प्रकरण में देखने को मिल रहा है। जहां अभी तक जांच की आंच सिर्फ पीपीएस तक पहुंची है। आईपीएस अफसरों पर कार्रवाई नहीं होने से विपक्ष ने भी इसे मुद्दा बना लिया है। हालांकि कानपुर में आईपीएस के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने का यह पहला मामला नहीं है।

हाल ही में वकील कम किसी गैंग की तर्ज पर काम कर रहे अखिलेश दुबे के लिए काम कर रहे इंस्पेक्टर सभाजीत मिश्रा की गिरफ्तारी 300 करोड़ की वक्फ की जमीन पर कब्जा कराने समेत कई संगीन आरोपों के बाद हुई। करीब ढाई हजार करोड़ की सम्पत्तियों पर कब्जा बताया जा रहा है। मिश्रा ने जिस आईपीएस का नाम लिया। उस पर शिकंजा कसने से बड़े-बड़े पुलिस अफसरों को मानो परहेज है। जिन तीन पीपीएस ने कानपुर में तैनाती के दौरान दुबे के साथ रियल एस्टेट की कम्पनी खड़ी करके करोड़ों का एम्पायर बनाया। वे एसआईटी के बुलावे पर नहीं जा रहे हैं।
अवैध सम्पत्तियों पर अभी तक क्यों नहीं चला बुलडोजर
आखिर इन अफसरों में इतनी हिम्मत किसके इशारों पर आ रही है। अखिलेश दुबे काण्ड में कार्रवाई खुद सीएम योगी के आदेश के बाद हो रही है। उसके बावजूद अभी तक अखिलेश दुबे की सम्पत्तियों पर बुलडोजर चलाने की हिमाकत किसी की नहीं हुई और न ही आरोपी डिप्टी एसपी जांच जारी रहने तक पदों से हटाए गए। जबकि एक डिप्टी एसपी तो सौ करोड़ के मालिक हैं। सिंडिकेट में शामिल अफसरों की फेहरिस्त लम्बी है। जिन्होंने दुबे के जरिये काली कमाई का जखीरा खपाया है। तभी एसआईटी के पास 50 से ज्यादा शिकायतें तो आईं, लेकिन रसूख के चलते एफआईआर पांच ही दर्ज हुईं। दुबे को रिमांड तक पर नहीं लिया गया। ऐसे में कानपुर काण्ड में कई सवाल उठने लाजिमी हैं।
कानपुर कांड में आईपीएस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई : अखिलेश
सोमवार को पार्टी मुख्यालय पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि कानपुर के माफिया अखिलेश दुबे के मामले में आइपीएस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह बहुत बड़ा मामला है, यदि इसकी जांच हो जाए तो पूरी भाजपा की पोल खुल जाएगी। कानपुर में हत्या, ब्लैकमेलिंग, फर्जी मुठभेड़, जमीन के सौदे और पैसों के लेन-देन जैसे गंभीर मामले सामने आए हैं। आईपीएस अधिकारी भी इसमें शामिल हैं।

माफिया विकास दुबे से जुड़े बिकरू काण्ड में भी तत्कालीन एसएसपी को मिली थी क्लीनचिट
कानपुर में इससे पहले माफिया विकास दुबे के मामले में तत्कालीन एसएसपी के नाम का भी जिक्र आया था। बिकरू काण्ड में उन्हें निलंबित भी किया गया। बाद में बहाली देकर एसटीएफ में डीआईजी बनाकर उपकृत किया गया। विकास के फाइनेंसर जय बाजपेयी से भी करीबी संबंध होने के आरोप उनके ऊपर लगे थे। बाद में जांच में क्लीनचिट दे दी गई।
सिंडिकेट में जो शामिल है जेल भेजेंगे : अखिल कुमार
कानपुर के पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार के मुताबिक शिकायतों पर विधिक राय के बाद कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। जहां साक्ष्य मिलेंगे, एफआईआर दर्ज की जायेगी। सिंडिकेट में जो भी शामिल होगा। जेल भेजा जाएगा।
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