UP News: रेरा की सख्ती दरकिनार, बिल्डरों के खिलाफ शिकायतें अपार
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (यू.पी. रेरा) का गठन निवेशकों के हितों की सुरक्षा और बिल्डरों पर नकेल कसने के खातिर किया गया था।

इसके बावजूद यूपी में न सिर्फ बिल्डरों की शिकायतें तेजी से बढ़ी हैं बल्कि कई नामी बिल्डरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की दरकार आज भी शिकायतकर्ताओं को है। हालांकि गठन से आज तक हजारों शिकायतों का निस्तारण दिखाकर यूपी रेरा अपनी पीठ ठोंकने में जुटा है। यूपी में शिकायतों के मामले में लखनऊ का स्थान दूसरा है। जबकि यहां खुद सीएम योगी आदित्यनाथ बैठते हैं। बिल्डरों के खिलाफ शिकायतों के मामलों में गौतमबुद्धनगर(नोएडा) टॉप पर बना हुआ है।
गठन से लेकर अभी तक दर्ज हुई 58545 शिकायतें
जानकारी के मुताबिक यूपी रेरा के पास गठन से लेकर अभी तक 58545 शिकायतें दर्ज कराई गयी हैं। अफसरों के मुताबिक इनमें से 50812 मामलों का निस्तारण भी किया जा चुका है। बिल्डरों की कारस्तानियों का आलम ये है कि इस वर्ष तक 2394 शिकायतें आ चुकी हैं। जिनमें लखनऊ नंबर दो और नोएडा शीर्ष स्थान पर है। इनमें से 1810 मामलों का समाधान किया जा चुका है।

अफसरों का दावा है कि लगभग 85.20 फीसदी निस्तारण दर के साथ यूपी रेरा देश की सबसे प्रभावी नियामक संस्था बन गई है। आशियानों के कब्जे, प्रमोटरों से ब्याज भुगतान और धन वापसी से जुडी अधिकांश शिकायतें रेरा में आ रही हैं। देश भर की 39 फीसदी शिकायतें अकेले यूपी रेरा ने दर्ज की हैं। वहीं निस्तारण का प्रतिशत 40 फीसदी बताया जा रहा है।
इन पांच जिलों से सबसे अधिक शिकायतें
यूपी रेरा में सबसे अधिक शिकायतें नोएडा, लखनऊ, गाजि़याबाद, वाराणसी और मेरठ जिलों से आईं हैं। इन क्षेत्रों में बिल्डरों की आवासीय परियोजनाओं और कब्ज़े में देरी प्रमुख मुद्दे रहे हैं।
रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता लाना मिशन: चेयरमैन
यू.पी. रेरा के चेयरमैन संजय भूसरेड्डी ने कहा कि गृह खरीदारों के अधिकारों की रक्षा और रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता लाना हमारा मिशन है। शिकायतों के उच्च निस्तारण दर से हमारी दक्षता और समय पर न्याय देने की प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है।
धन कुबेर हैं विकास प्राधिकरणों के अफसर
ज्यादा शिकायतों वाले जिलों के बड़े विकास प्राधिकरणों में तैनात तमाम अफसर इंजीनियर भी कठघरे में हैं। कई अफसरों-इंजीनियरों की बिल्डरों संग साठगांठ है। नोएडा अथॉरिटी में तैनात रहे कई अफसर-इंजीनियर अरबों के मालिक हैं। जांच एजेंसियों के छापों में बेनकाब भी हुए हैं। परदे के पीछे से ऐसे अफसर-इंजीनियर कई फर्में भी चला रहे हैं।
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