UP News: भू-माफियाओं को सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा कराता था तहसीलदार
मुख्यमंत्री संदर्भों पर भी कार्रवाई नहीं, अरविंद पांडेय व लेखपाल संदीप यादव को चकबंदी आयुक्त ने किया निलंबित
Sandesh Wahak Digital Desk: राजधानी में सीएम की नाक के नीचे राजस्व अफसर अरबों की सरकारी जमीनों पर भूमाफियाओं और बिल्डरों को कब्जा करा रहे हैं। सीएम के दफ्तर से जहां कार्रवाई के लिए निर्देशित किया जाता है। वहां भी राजस्व अफसर भूमाफियाओं से मिलीभगत करके उन्हें लाभ पहुंचाने का काम करते हैं। ताजा मामला नगर निगम लखनऊ के तहसीलदार अरविन्द पांडेय और लेखपाल संदीप कुमार यादव का है। जिन्हे लखनऊ कमिश्नर डॉ रोशन जैकब की संस्तुति पर गुरुवार को चकबन्दी आयुक्त भानु चंद्र गोस्वामी ने निलंबित करके भ्रष्टों को सख्त सन्देश दिया। दोनों चकबंदी से नगर निगम में प्रतिनियुक्ति पर आये थे।

निलंबन आदेश के मुताबिक विभागीय जांच में बाराबंकी के उपसंचालक चकबंदी को जांच अधिकारी बनाया गया है। माना जा रहा है कि पांडेय ने सरोजनीनगर में जमीनों के खेल से करोड़ों की अवैध कमाई की है। वहीं संदीप का निलंबन आदेश मिर्जापुर से जारी हुआ है।

चकबंदी आयुक्त के आदेश के मुताबिक 14 जून को भेजे आयुक्त, के पत्र में दिया है कि आईजीआरएस पोर्टल पर मुख्यमंत्री संदर्भ 1515240181621 पर प्रमुख सचिव, मुख्यमंत्री द्वारा दिये निर्देशों पर नौ जून को ग्राम बेहसा का निरीक्षण किया गया। ग्राम बेहसा, परगना बिजनौर, तहसील-सरोजनीनगर की भूमि खसरा संख्या-1418, 1422 व नवीन परती खसरा संख्या-1418 कुल क्षेत्रफल लगभग 06 एकड़ व इसी भूमि से लगी हुई खसरा संख्या-1418 में अतिक्रमण/अवैध कब्जा पाया गया।
अरविंद पांडेय की संपत्तियों की जांच बेहद जरूरी
तहसीलदार के रहते सरोजिनीनगर तहसील में सरकारी जमीन कब्जाने की घटनाएं बढ़ीं हैं। भाकियू ने भी 17 मई को ज्ञापन देकर बताया था कि जितेन्द्र यादव ग्राम कल्ली पश्चिम, तहसील सरोजनीनगर में पट्टे की जमीन, ऊसर, बंजर और अन्य सरकारी सुरक्षित भूमियों की बिक्री अवैध रूप से कर रहा है। ग्राम कल्ली पश्चिम के स्थलीय निरीक्षण में गत दिनों कमिश्नर डॉ रोशन जैकब के सामने पूरा खेल आ गया। स्थलीय निरीक्षण के दौरान ग्राम कल्ली पश्चिम के सरकारी गाटा संख्या-1459, 1461 व 1228ख पर भू-माफियाओं द्वारा अवैध कब्जा करके प्लाटिंग की जा रही थी। नगर निगम द्वारा सरकारी भूमि को अवैध कब्जामुक्त करने की दिशा में कोई कार्यवाही नही दिखी।
पिछले वर्ष 20.जुलाई को अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), लखनऊ को भेजे पत्र में ग्रामसभा/सरकारी जमीनों का गाटावार सर्वे कराकर अनधिकृत / अवैध कब्जा प्राथमिकता के आधार पर हटाये जाने के निर्देश दिये गये। निगम सीमा में आने वाले संवेदनशील ग्रामों के समस्त गाटों की पड़ताल करने के पुन: निर्देश दिये गये। सरोजनीनगर तहसील के अन्तर्गत आने वाले ग्रामों में जिनमें अत्यधिक अनधिकृत कब्जे किये गये हैं, उनमें मुख्य रूप से कल्ली पश्चिम, बिरूरा, नीवां, बिजनौर, कमालपुर, सेवई, औरंगाबाद जागीर, नटकुर इत्यादि ग्रामसभाओं में सरकारी जमीनों पर हो रही प्लाटिंग व अनधिकृत कब्जों से सम्बन्धित शिकायतें कमिश्नर को प्राप्त हो रही थी।

अवैध कब्जे का खुला खेल
नगर निगम के नायब तहसीलदार ने इस वर्ष 24 मई को दी रिपोर्ट में ग्राम नटकुर के 176 गाटों, ग्राम सेवई के 57 गाटों, ग्राम बिजनौर के 232 गाटों, ग्राम बिरूरा के 20 गाटों, ग्राम कल्ली पश्चिम के 126 गाटों, ग्राम हरिहरपुर के 102 गाटा पर अवैध कब्जा और अतिक्रमण पाया गया। जो ऊसर, बंजर, नवीन परती व तालाब के खाते में दर्ज है, जिन पर प्लाटिंग एवं रास्ते के रूप में अवैध कब्जा किया गया है। वहीं ग्राम औरंगाबाद जागीर के तीन खसरा संख्याओं-1414स, 1418स, 924, 317, 1390, 1217, 1147, 1146, 1126, 572 मि0, 1191, 1197 व 915, जो कि राजस्व अभिलेखों में बंजर, ऊसर, नवीन परती, रास्ता व नाली के खाते में दर्ज है।
गाटा संख्या-1132, 1120 व 1121, जो कि राजस्व अभिलेखों में चकरोड, ऊसर, नाली के खाते में दर्ज है, पर प्रापर्टी डीलरों द्वारा अवैध रूप से रिहायशी कालोनी व व्यावसायिक निर्माण कर अवैध रूप से कब्जा किया गया था। नगर निगम लखनऊ में तैनात क्षेत्रीय लेखपाल संदीप यादव पर आरोप है कि उन्होंने सरोजनीनगर लखनऊ में जमीन खसरा संख्या-1418, 1421 व 1422 पर अवैध कब्जे होने दिए। अवैध कब्जा करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसलिए दोनों को तत्काल निलंबित किया गया है। पांडेय बस्ती जिले से संबद्ध था।

सरोजनीनगर तहसील भूमाफियाओं की पहली पसंद, एसडीएम भी हो चुके हैं बेनकाब
इससे पहले लखनऊ कमिश्नर रोशन जैकब ने सरोजनीनगर एसडीएम सचिन वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की थी। दरअसल लखनऊ में सरोजनीनगर तहसील भूमाफियाओं के नजरिये से बेहद संवेदनशील है। तहसील में बाहरी व्यक्ति लगातार सक्रिय होकर अफसरों और कर्मियों को मानो खरीद लेते हैं। इसलिए सीएम योगी ने तहसील में बाहरियों के प्रवेश पर रोक लगाई थी। निलंबित तहसीलदार अरविन्द पांडेय की अकूत सम्पत्तियों की पड़ताल भी गहराई से होना चाहिए। पांडेय कई अफसरों और सियासी हस्तियों का बेहद करीबी है। इसीलिए लंबे समय से फर्जीवाड़े में लिप्त था।

दुरभि संधि से पांडेय ने लगातार कराये अवैध कब्जे
चकबंदी आयुक्त के आदेश के मुताबिक तहसीलदार अरविन्द पांडेय ने सरकारी भूमियों पर हुए अवैध अतिक्रमण वाले स्थलों का चिन्हांकन नही कराया। इसकी तैनाती में लगातार अवैध कब्जे हो रहे थे। चकबंदी आयुक्त ने साफ कहा है कि पाण्डेय द्वारा अवैध कब्जेदारों/भू-माफियाओं के विरूद्ध कार्यवाही न करना, भू-माफियाओं के साथ दुरभि सन्धि को दर्शाता है।
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