‘यूपी के अफसरों को अब 10 मिनट में करना होगा कॉल बैक’, ‘संवाद सेतु’ से दूर होगी विधायकों की नाराजगी

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश की राजनीति में अक्सर यह शिकायत सुनने को मिलती है कि “साहब फोन नहीं उठाते”। लेकिन अब यूपी सरकार ने इस समस्या का परमानेंट इलाज खोज लिया है। 25 फरवरी से प्रदेश में ‘संवाद सेतु’ (जिला संपर्क एवं कमांड सेंटर) व्यवस्था लागू होने जा रही है। अब अगर किसी जनप्रतिनिधि का फोन अधिकारी ने नहीं उठाया, तो उसे 10 मिनट के भीतर कॉल बैक करना अनिवार्य होगा।

कमांड सेंटर रखेगा ‘कॉल’ पर नजर

इस नई व्यवस्था के तहत हर जिले में एक ‘कमांड सेंटर’ बनाया जाएगा। यदि कोई अधिकारी जनप्रतिनिधि की कॉल रिसीव नहीं करता है। अधिकारी को 10 मिनट के अंदर वापस फोन करना होगा। अगर कॉल बैक नहीं आता है, तो जनप्रतिनिधि सीधे कमांड सेंटर को इसकी जानकारी देंगे। कमांड सेंटर संबंधित अधिकारी को तुरंत कॉल बैक करने के लिए निर्देशित करेगा और इस पूरे संवाद का रिकॉर्ड रखेगा।

पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 3 जिलों से शुरुआत

समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण की पहल पर इस योजना को सबसे पहले गाजियाबाद, हरदोई और कन्नौज में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जा रहा है। इन जिलों की सफलता के बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। मंत्री ने तीनों जिलों के डीएम को निर्देश दिए हैं कि इसकी तैयारियों में कोई कमी न रहे।

नियम और शर्तें: केवल CUG नंबर पर लागू

यह केवल सरकारी (CUG) नंबरों पर प्रभावी होगी।

यह सुविधा केवल कार्य दिवस (Working Days) और कार्यालय समय के दौरान ही लागू रहेगी।

अच्छा संवाद करने वाले अफसरों को सराहा जाएगा, जबकि लापरवाही बरतने वालों की रिपोर्ट सीधे शासन को भेजी जाएगी।

विधानसभा में गूंजा था मामला

इस सख्त कदम की नींव 17 फरवरी को विधानसभा में पड़ी थी। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने जब अधिकारियों के रवैये का मुद्दा उठाया, तो विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने इसे बेहद गंभीर माना था। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया था कि संविधान के अनुसार मंत्रिपरिषद विधानसभा के प्रति उत्तरदायी है, इसलिए अधिकारियों को विधायकों की बात सुननी ही होगी और उन्हें उचित सम्मान देना होगा।

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