यूपी में बोतलबंद पानी बेचने के नियम सख्त, BIS प्रमाणन के बिना नहीं मिलेगा लाइसेंस
Uttar Pradesh Packaged Water: उत्तर प्रदेश में बोतलबंद पानी की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने नियम सख्त कर दिए हैं। अब नई पैक्ड पेयजल और पैक्ड मिनरल वॉटर इकाइयों को भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) का प्रमाणन मिलने के बाद ही खाद्य सुरक्षा लाइसेंस या पंजीकरण जारी किया जाएगा। वहीं, पहले से चल रही सभी 968 इकाइयों को 31 मार्च 2027 तक प्रमाणन लेना होगा।
निर्धारित समय तक प्रमाणन नहीं लेने वाली इकाइयों का लाइसेंस या पंजीकरण निलंबित रहेगा और उनका उत्पादन भी बंद रहेगा। एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। यह व्यवस्था प्रदेश में तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। इसके दायरे में केंद्रीय लाइसेंस वाली पानी निर्माण इकाइयां भी आएंगी।
एक साल में 660 नमूनों की जांच, 513 गुणवत्ता मानकों पर फेल
एफएसडीए ने एक वर्ष के दौरान प्रदेश की 811 पैक्ड पेयजल और पैक्ड मिनरल वॉटर निर्माण इकाइयों का निरीक्षण कर कार्रवाई की। इन इकाइयों से लिए गए 660 नमूनों की जांच में 176 नमूने स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित और 337 अधोमानक पाए गए। यानी कुल 513 नमूने तय गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे।
असुरक्षित नमूनों में ई-कोलाई, कोलीफॉर्म बैक्टीरिया, यीस्ट और मोल्ड जैसे सूक्ष्मजीव मिले। जांच में कहीं पानी साफ करने की व्यवस्था में कमी मिली तो कहीं सफाई और भंडारण के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था।
वहीं, अधोमानक नमूनों में कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे खनिजों की मात्रा सामान्य स्तर से कम पाई गई। कई इकाइयों में पानी के स्रोत की जांच रिपोर्ट भी उपलब्ध नहीं थी। इसके अलावा जरूरी फिल्टर, अल्ट्रावायलेट (यूवी) ट्रीटमेंट प्लांट और ओजोनीकरण जैसी पानी शुद्ध करने की सुविधाओं की कमी भी सामने आई।
152 इकाइयों के लाइसेंस निलंबित, 55 केंद्रीय लाइसेंस पर कार्रवाई की सिफारिश
जांच के बाद एफएसडीए ने 152 इकाइयों के लाइसेंस या पंजीकरण निलंबित कर दिए। जरूरी सुधार होने तक इन इकाइयों का उत्पादन बंद करा दिया गया। जिन इकाइयों के नमूने स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित मिले, वहां भी नियमों के अनुसार उत्पादन बंद कराने की कार्रवाई की गई।
इसके अलावा केंद्रीय लाइसेंस वाली 55 इकाइयों के लाइसेंस निलंबित करने की सिफारिश की गई है। नए नियम के तहत नई इकाइयों को लाइसेंस लेने से पहले बीआईएस प्रमाणन हासिल करना होगा। मौजूदा इकाइयों को तय समय में प्रमाणन लेकर अपनी पात्रता सुनिश्चित करनी होगी।
प्रमाणन की अनिवार्यता हटने के बाद बढ़ी थीं इकाइयां
खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विक्रय प्रतिषेध एवं निर्बंधन) विनियम, 2011 के तहत पैक्ड पेयजल और पैक्ड मिनरल वॉटर की बिक्री के लिए आईएसआई प्रमाणन जरूरी था। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने 18 अक्टूबर 2024 से यह अनिवार्यता समाप्त कर दी थी। इसके बाद इन उत्पादों को उच्च जोखिम वाले खाद्य उत्पादों की श्रेणी में रखते हुए निर्माण इकाइयों के लाइसेंस के लिए बीआईएस प्रमाणन की शर्त भी हटा दी गई थी।
इस बदलाव के बाद प्रदेश में पैक्ड पेयजल और पैक्ड मिनरल वॉटर बनाने वाली इकाइयों की संख्या बढ़ी। वर्तमान में इनकी कुल संख्या 968 बताई गई है। अब एफएसडीए ने नई इकाइयों के लिए बीआईएस प्रमाणन अनिवार्य कर दिया है और पहले से चल रही इकाइयों को भी 31 मार्च 2027 तक इसे हासिल करने का समय दिया है।

