UP पुलिस बनेगी और भी ‘स्मार्ट’: DGP बोले- वर्दी की छवि व्यवहार से बनती है

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश पुलिस के व्यवहार और कार्यशैली को आधुनिक दौर की जरूरतों के मुताबिक ढालने के लिए एक विशेष तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आगाज हुआ है। पुलिस प्रशिक्षण निदेशालय ने देश के प्रतिष्ठित ‘टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज़’ (TISS) के साथ हाथ मिलाया है, ताकि पुलिसकर्मियों को सामाजिक और तकनीकी रूप से अधिक दक्ष बनाया जा सके।

‘सीखने की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती’

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए यूपी के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए एक बहुत बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि पुलिसिंग में ज्ञान से ज्यादा दृष्टिकोण (Attitude) मायने रखता है। DGP ने स्पष्ट किया कि 4 लाख की विशाल फोर्स में से चुने गए ये 40 अधिकारी असल में यूपी पुलिस के ‘एंबेसडर’ हैं।

उन्होंने कहा, “पुलिस की असली परीक्षा तब होती है जब वह जनता से संवाद करती है। प्रभावी संचार (Communication) ही पुलिस की छवि बनाता है। हाल ही में महाकुंभ और माघ मेले में पुलिस के नरम और मददगार व्यवहार की वैश्विक स्तर पर जो तारीफ हुई, वह बेहतर ट्रेनिंग का ही नतीजा है।”

UP पुलिस बनेगी और भी 'स्मार्ट': DGP बोले- वर्दी की छवि व्यवहार से बनती है

मानवीय और संवेदनशील पुलिसिंग पर जोर

TISS के कुलपति प्रो. बद्री नारायण तिवारी ने कार्यशाला में कहा कि भारत में पुलिसिंग बहुत चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि यहां पुलिस को कई सामाजिक दबावों के बीच काम करना पड़ता है। इस पायलट प्रोजेक्ट का मकसद पुलिसकर्मियों को अधिक संवेदनशील बनाना है ताकि वे आम आदमी की समस्याओं को और बेहतर तरीके से समझ सकें।

UP पुलिस बनेगी और भी 'स्मार्ट': DGP बोले- वर्दी की छवि व्यवहार से बनती है

प्रशिक्षण के तीन मुख्य स्तंभ (Modularity)

  • यह कार्यशाला केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे तीन महत्वपूर्ण हिस्सों में बांटा गया है।
  • इसमें अधिकारियों को आत्म-जागरूकता, प्रभावी बातचीत और जेंडर सेंसिटिविटी (लैंगिक संवेदनशीलता) सिखाई जा रही है। इसका मकसद पुलिस को ‘नॉन-जजमेंटल’ बनाना है।
  • यहां फोकस तनाव प्रबंधन (Stress Management) और समय के सही उपयोग पर है। साथ ही, आज के दौर की सबसे बड़ी चुनौती यानी AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और सोशल मीडिया प्रबंधन की ट्रेनिंग भी दी जा रही है।
  • इसमें ‘रोल प्ले’ के जरिए अधिकारियों को वास्तविक स्थितियों में डालकर देखा जा रहा है कि वे दबाव में कैसे सही और कानूनी रूप से सटीक निर्णय लेते हैं।

बदलाव की नींव

पुलिस प्रशिक्षण निदेशालय के महानिदेशक राजीव सभरवाल ने बताया कि इस ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य पुलिसकर्मियों को आधुनिक तकनीकी चुनौतियों के प्रति तैयार करना और उनकी संवाद शैली को सुधारना है। यह प्रशिक्षण न केवल उनके पेशेवर जीवन को बेहतर बनाएगा, बल्कि उनके व्यक्तिगत जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाएगा।

Also Read: लखनऊ: जेल में दोस्ती और शुरू हुई जुर्म की दास्तान, चिनहट पुलिस ने पकड़े दो हाईप्रोफाइल चोर

Get real time updates directly on you device, subscribe now.