UP पुलिस का ‘मिशन जीवन रक्षक’, मेटा अलर्ट ने बचाई युवती और युवक की जान
इंस्टाग्राम पर सुसाइड नोट पोस्ट करते ही हरकत में आया लखनऊ मुख्यालय, 10 से 15 मिनट के भीतर घर पहुंची पुलिस, अब तक 2266 लोगों को मिल चुका है नया जीवन
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश पुलिस की ‘मेटा सुसाइडल अलर्ट’ पहल एक बार फिर वरदान साबित हुई है। पिछले 24 घंटों के भीतर यूपी पुलिस ने फेसबुक और इंस्टाग्राम (मेटा) से मिले अलर्ट के आधार पर सुल्तानपुर की एक युवती और कौशाम्बी के एक युवक को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया। लखनऊ मुख्यालय से मिले निर्देश के बाद स्थानीय पुलिस ने महज 10 से 15 मिनट के भीतर मौके पर पहुंचकर इन कीमती जानों को बचा लिया।
केस 1: सुल्तानपुर में 15 मिनट में पहुंची ‘लाइफ-लाइन’
सुल्तानपुर के थाना जयसिंहपुर इलाके की एक 19 वर्षीय युवती ने इंस्टाग्राम पर चूहेमार दवा पीते हुए वीडियो पोस्ट किया और लिखा “भगवान जी बुला लो अपने पास”। शाम 06:55 बजे मेटा ने इसका अलर्ट लखनऊ सोशल मीडिया सेंटर को भेजा। डीजीपी मुख्यालय के निर्देश पर सटीक लोकेशन ट्रेस की गई और मात्र 15 मिनट में पुलिस युवती के कमरे में थी। युवती हांफ रही थी, जिसे तुरंत अस्पताल ले जाकर बचा लिया गया। युवती एक युवक से शादी करना चाहती थी, लेकिन परिवार के इनकार के कारण तनाव में थी।
केस 2: कौशाम्बी में 10 मिनट में टला ‘आखिरी दिन’ का खतरा
कौशाम्बी के मंझनपुर थाना क्षेत्र के 18 वर्षीय युवक ने पोस्ट किया “आज मेरा लास्ट दिन है, आज मैं जहर खा लूंगा।” दोपहर 01:12 बजे मिले अलर्ट के बाद पुलिस ने बिजली की फुर्ती दिखाई और 10 मिनट के भीतर युवक के घर पहुंचकर उसे आत्मघाती कदम उठाने से रोक लिया। पारिवारिक विवाद के चलते युवक मानसिक अवसाद में था।
सम्मानित हुई UP पुलिस की यह तकनीक
यूपी पुलिस और मेटा कंपनी के बीच 2022 से चल रही इस व्यवस्था की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1 जनवरी 2023 से अब तक 2266 लोगों को आत्महत्या करने से रोका जा चुका है। इस नवाचार के लिए यूपी पुलिस को प्रतिष्ठित SKOCH Award-2025 और The Economic Times GovTech Awards-2026 से नवाजा जा चुका है।
कैसे काम करता है यह सिस्टम?
जब भी कोई व्यक्ति फेसबुक या इंस्टाग्राम पर आत्महत्या से संबंधित कीवर्ड या वीडियो पोस्ट करता है, तो मेटा का एल्गोरिदम तुरंत यूपी पुलिस मुख्यालय को ई-मेल और फोन के जरिए अलर्ट भेजता है। इसके बाद सोशल मीडिया सेंटर 24×7 सक्रिय रहकर पीड़ित की लोकेशन ट्रेस करता है और संबंधित जिले की पुलिस को मौके पर भेजता है।
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