UP Politics: ‘अंसारी परिवार का दरबारी नहीं बन सकता…’, चुनाव के बीच सपा को लगा बड़ा झटका

Lok Sabha Elections: पूर्वांचल की बलिया लोकसभा सीट के लिए सातवें और अंतिम चरण में 1 जून को मतदान होना है. चुनाव प्रचार के लिए महज तीन दिन का समय बचा है और वोटिंग में केवल चार दिन. मतदान इतना करीब है और समाजवादी पार्टी को तगड़ा झटका लगा है. सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के करीबी रहे पूर्व मंत्री नारद राय ने पार्टी छोड़ने, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) जॉइन करने का ऐलान कर दिया है. बलिया के बड़े नेताओं में गिने जाने वाले नारद ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद एक्स पर पोस्ट कर यह ऐलान कर दिया है.

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दरअसल, नारद राय ने बीते सोमवार रात ‘X’ पर एक पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की प्रशंसा की. नारद राय दिवंगत सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के करीबी माने जाते हैं. उन्होंने अमित शाह के साथ अपनी मुलाकात की एक तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर साझा की, जो निकट भविष्य में संभावित दलबदल का संकेत देती नज़र आ रही है… कहा जा रहा है कि 29 मई को बलिया में गृह मंत्री अमित शाह की रैली में नारद राय भाजपा में शामिल होंगे.

 

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नारद राय के इस कदम को लेकर कहा कि परिवार का घर छोड़ते हो या पार्टी छोड़ते हो तो तकलीफ होती है. और खास तौर ऐसी पार्टी छोड़ने में जहां मैंने अपनी जिंदगी के 40 साल गुजार दिए. छोटे लोहिया (जनेश्वर मिश्र) ने मुझे छात्र राजनीतिक से निकालकर मुख्य धारा की राजनीति से जोड़ा. उनके आशीर्वाद से एमएलए बना, मंत्री बना और जितना हुआ विकास भी किया. इलाहाबाद में जब जनेश्वर मिश्र नहीं रहे तो मैं रो रहा था. तब नेताजी (मुलायम सिंह यादव) ने कहा, नारद मैं जिंदा हूं. जब तक रहूंगा कभी जनेश्वर मिश्र की कमी तुम्हें नहीं खलने दूंगा. हमारा दुर्भाग्य है कि अब नेताजी भी नहीं रहे….

अखिलेश यादव ने 2022 में मुझे हराने का पूरा इंतजाम किया

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नारद राय ने आगे कहा कि एक घटना ऐसी हुई जिसे सब जानते हैं. तब भी मैं नेताजी के साथ बेटा बनकर खड़ा रहा और अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के नेता बनकर खड़े रहे कि हमको हिस्सेदारी दो. हम लोग बार-बार कह रहे थे कि नेताजी के सम्मान को मत घटाइए. नेताजी को जिंदगी भर अध्यक्ष रहने दीजिए. बाकी सबकुछ आप लोगों का है. आप लोगों का रहेगा. यही नेताजी की इच्छा थी और मैं उसके लिए लड़ता रहा. उसी बीच में अखिलेश से हमारी दूरी बढ़ती गई और उन्होंने हमको 2017 के विधानसभा चुनाव में टिकट भी नहीं दिया. नेताजी की जिद थी कि नारद राय को चुनाव लड़ाना है. अखिलेश ने 2022 में हमको टिकट तो दिया लेकिन सीधे-सीधे मेरे हारने का भी इंतजाम किया.’

अंसारी परिवार के दबाव में मेरा टिकट काट दिया

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पूर्वांचल के कद्दावर भूमिहार नेता नारद राय ने कहा जो लोग हमारा विरोध कर रहे थे, पार्टी पदाधिकारियों के कंप्लेंट के बाद भी उन पर एक्शन नहीं हुआ. एक छोटे नेता को भी हमारे क्षेत्र में नहीं भेजा. पहली बार बलिया मुख्यालय पर समाजवादी पार्टी का कोई राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं आया. संदेश दिया गया कि नारद राय तो मुलायम सिंह का उम्मीदवार है और अखिलेश इसको पसंद नहीं करते. फिर भी मैं लग रहा और कोशिश करता रहा कि हमारे और उनके रिश्ते बने रहें. नेताजी चुनाव के बाद भी अखिलेश से कहते थे कि नारद राय का ख्याल रखो. मैं तो लोकसभा का उम्मीदवार था ही नहीं. अखिलेश यादव ने मुझे बुलाया, मैंने कहा चुनाव लड़ने के लिए मेरे पास पैसे नहीं हैं. उन्होंने कहा कि पैसे का इंतजाम हो जाएगा. फिर वह अचानक अंसारी परिवार के इतने दबाव में आ गए कि हमारा टिकट काट दिया.

ऐसे में अब देखना दिलचस्प होगा कि आखिर नारद राय के समाजवादी पार्टी छोड़ने से पूर्वांचल की राजनीति पर क्या कुछ असर पड़ता है.

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