साइबर ठगों पर यूपी पुलिस का भारी प्रहार, ठगी के 48 करोड़ रुपये ‘फ्रीज’ कराकर देश में हासिल किया तीसरा स्थान

Sandesh Wahak Digital Desk: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और उत्तर प्रदेश पुलिस की मुस्तैदी का बड़ा परिणाम सामने आया है। जनवरी 2026 के ताजा आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश अब साइबर ठगी की गई धनराशि को बैंक खातों में ब्लॉक (Lien) करने के मामले में देश का तीसरा सबसे सफल राज्य बन गया है। महज कुछ महीनों के भीतर यूपी ने अपनी रैंकिंग 24 से सुधारकर सीधे टॉप-3 में जगह बना ली है।

क्या है यह उपलब्धि? (Lien % का गणित)

जब भी किसी के साथ साइबर ठगी होती है, तो पुलिस और बैंक मिलकर उस पैसे को अपराधी के खाते से निकलने से पहले ही फ्रीज कर देते हैं। इसे ‘Lien’ कहा जाता है।

  • उत्तर प्रदेश में जनवरी महीने में करीब 138 करोड़ रुपये की ठगी रिपोर्ट हुई।

  • पुलिस की सक्रियता से इसमें से 48 करोड़ 45 लाख रुपये अपराधियों के निकालने से पहले ही बैंक खातों में फ्रीज कर दिए गए।

  • यूपी का ‘लियन प्रतिशत’ 35.02% रहा, जो कि एक बड़ी कामयाबी है।

कैसे बदली यूपी की तस्वीर?

पुलिस महानिदेशक (DGP) प्रशांत कुमार और साइबर क्राइम हेड बी.के. सिंह के नेतृत्व में पिछले आठ महीनों में कई ठोस कदम उठाए गए:

  1. नया कॉल सेंटर: कल्ली पश्चिम, लखनऊ में एक अत्याधुनिक 30 सीटर कॉल सेंटर शुरू किया गया, जिससे कॉल अटेंड करने की क्षमता बढ़ गई। इसे जल्द ही 60 सीटर किया जाएगा।

  2. बैंकों का साथ: कॉल सेंटर में ही 13 प्रमुख बैंकों के प्रतिनिधि बैठते हैं, जो रियल टाइम में पैसा फ्रीज करते हैं।

  3. व्यापक जागरूकता: प्रदेश भर में 500 से ज्यादा कैंप लगाए गए और खुद DGP ने ऑनलाइन माध्यम से 1 लाख से ज्यादा लोगों को साइबर सुरक्षा का पाठ पढ़ाया।

जनवरी 2026: देश के टॉप-3 राज्य

स्थान प्रदेश रिपोर्ट की गई धनराशि (लाख में) फ्रीज (Lien) धनराशि (लाख में) प्रतिशत
प्रथम दादरा और नगर हवेली 63.96 39.94 62.44%
द्वितीय हरियाणा 5858.23 2092.73 35.72%
तृतीय उत्तर प्रदेश 13831.93 4845.27 35.02%

DGP का संदेश: इन 4 कारणों से बचें

पुलिस महानिदेशक ने आम जनता को सचेत करते हुए कहा कि साइबर अपराध अक्सर इन चार वजहों से होते हैं:

  1. लालच: पैसा दोगुना करने वाली स्कीमों से बचें।

  2. लापरवाही: अनजान लोगों से ओटीपी (OTP) साझा न करें।

  3. लत: ऑनलाइन गेमिंग के लालच में अपनी जमापूंजी न गंवाएं।

  4. भय (डिजिटल अरेस्ट): याद रखें, कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी या पैसे की मांग नहीं करती।

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