SIR पर कांग्रेस के तीन सवाल, मोना बोलीं- ‘वोट चोरी की दाल में पूरी दाल काली’

Aradhana Mishra Mona: उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने एसआईआर को लेकर भाजपा और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के जरिए करोड़ों नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने की साजिश की जा रही है।

मोना ने कहा कि लोकसभा चुनाव में भाजपा ने ‘400 पार’ का नारा देकर संविधान बदलने का संकेत दिया था। लेकिन संविधान और लोकतंत्र की रक्षा करने वाली जनता ने उत्तर प्रदेश में भाजपा को आधा कर सत्ता को बैसाखियों पर ला दिया।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राहुल गांधी लंबे समय से मतदाता सूची और एसआईआर को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा, “वोट चोरी की दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली है।”

मोना ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के समर्थन में चार बिंदुओं का जिक्र किया। उनके मुताबिक, एक मीडिया की रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों संधू और जोशी द्वारा फॉर्म-6 में नियमों के विपरीत बदलाव पर आपत्ति जताए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि मुख्य न्यायाधीश ने फॉर्म-6 में बदलाव की अनुमति देने से इनकार किया है।

मोना ने जस्टिस भुइयां की सार्वभौमिक मताधिकार को लेकर टिप्पणी और पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रोहिंटन नरीमन की पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में मतदाता नाम हटाए जाने पर उठाई गई आपत्ति का भी जिक्र किया।

पहला सवाल, 16.18 लाख अतिरिक्त नाम कैसे जुड़े?

मोना ने कहा कि यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध फॉर्म-6 के अनुसार करीब 71.38 लाख आवेदन हैं। वहीं, अंतिम मतदाता सूची में 84.28 लाख नाम जोड़े गए हैं।

कांग्रेस के मुताबिक दोनों आंकड़ों के बीच करीब 16.18 लाख नामों का अंतर है। मोना ने चुनाव आयोग से पूछा कि ये अतिरिक्त नाम किस प्रक्रिया के तहत जोड़े गए और इनके फॉर्म-6 व अन्य विवरण कहां उपलब्ध हैं।

दूसरा सवाल, 3.52 करोड़ मतदाताओं का अंतर क्यों?

कांग्रेस के अनुसार 2026 की त्रिस्तरीय पंचायत मतदाता सूची में करीब 12.58 करोड़ और 2023 की नगरीय निकाय मतदाता सूची में करीब 4.33 करोड़ मतदाता थे। दोनों आंकड़ों को जोड़ने पर संख्या करीब 16.91 करोड़ होती है।

मोना ने कहा कि एसआईआर के बाद विधानसभा की अंतिम मतदाता सूची में करीब 13.39 करोड़ मतदाता रह गए। कांग्रेस ने दोनों आंकड़ों के बीच करीब 3.52 करोड़ मतदाताओं के अंतर पर चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है।

तीसरा सवाल, 2.04 करोड़ नाम कहां गए?

मोना ने कहा कि एसआईआर से पहले विधानसभा मतदाता सूची में 15.44 करोड़ मतदाता थे। अंतिम सूची में यह संख्या घटकर 13.39 करोड़ रह गई। यानी करीब 2.04 करोड़ नाम कम हुए।

उन्होंने चुनाव आयोग से पूछा कि इनमें कितने नाम मृत्यु, स्थान परिवर्तन, डुप्लीकेट नाम, अनुपलब्धता, दस्तावेजों के अभाव या अन्य कारणों से हटाए गए।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मांग की कि चुनाव आयोग जिला और बूथवार आंकड़े सार्वजनिक करे। साथ ही हटाए गए प्रत्येक नाम और उसे हटाने का कारण भी उपलब्ध कराया जाए।

मोना ने कहा कि मतदाता केवल एक संख्या नहीं, बल्कि संविधान से मिला लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस मताधिकार और संविधान पर किसी भी हमले को स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा, “संविधान बचेगा, लोकतंत्र बचेगा और जनता का वोट बचेगा।”

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