UP समाज कल्याण विभाग में भर्तियों पर चला जांच का चाबुक, 460 नियुक्तियों की होगी पड़ताल
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश का समाज कल्याण विभाग अपनी आउटसोर्सिंग नियुक्तियों को लेकर कड़ा रुख अपना रहा है। विभाग ने फैसला किया है कि पिछले कुछ समय में आउटसोर्सिंग के जरिए रखे गए सभी 460 कर्मचारियों के दस्तावेजों और चयन प्रक्रिया की गहराई से जांच की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
जांच की चिंगारी तब सुलगी जब विभाग की प्रतिष्ठित ‘मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग’ में कोर्स कोऑर्डिनेटरों की भर्ती में गंभीर खामियां पाई गईं। पता चला कि जिन पदों पर विशेषज्ञों की जरूरत थी, वहां उन लोगों को भर्ती कर लिया गया जो निर्धारित योग्यता (Eligibility) को पूरा ही नहीं करते थे। इस खुलासे के बाद हड़कंप मच गया और अब विभाग ने सभी स्तरों पर हुई भर्तियों को जांच के दायरे में ले लिया है।
किन पदों पर अटकी है जांच की सुई?
कंप्यूटर ऑपरेटर (300 पद): इन्हें करीब 18 हजार रुपये महीना मानदेय मिलता है।
एमटीएस/चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (150 पद): इन्हें 10 हजार रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं।
कंप्यूटर प्रोग्रामर (10 पद): इनका मानदेय 60 हजार रुपये महीने तक है।
इन जगहों पर तैनात हैं ये कर्मचारी
ये भर्तियां केवल मुख्यालय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे प्रदेश के राजकीय आश्रम पद्धति स्कूलों में,अभ्युदय कोचिंग सेंटरों में, छात्रवृत्ति योजना से जुड़े डेस्क और मंडलीय कार्यालयों में की गई हैं।
जांच में क्या खोजेगी पुलिस और प्रशासन?
विभाग की ओर से जारी पत्र के अनुसार, जांच टीम दो मुख्य बिंदुओं पर फोकस करेगी। पहला- क्या चयनित व्यक्ति के पास पद के लिए जरूरी डिग्री और अनुभव था? दूसरा- क्या चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती गई या किसी खास एजेंसी ने मिलीभगत कर अयोग्य लोगों को पिछवाड़े के रास्ते (Backdoor entry) विभाग में घुसा दिया?
समाज कल्याण विभाग के इस फैसले से उन एजेंसियों और अधिकारियों में हड़कंप है, जो अब तक आउटसोर्सिंग को मनमानी का जरिया मानते थे। अधिकारियों का कहना है कि अगर जांच में गड़बड़ी मिली, तो न केवल कर्मचारियों को निकाला जाएगा, बल्कि संबंधित आउटसोर्सिंग कंपनियों को ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है।

