UP बनेगा ग्लोबल एआई हब: एएम ग्रुप और इन्वेस्ट यूपी के बीच 2 लाख करोड़ का एमओयू

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और तकनीकी भविष्य के लिए आज का दिन एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘डिजिटल उत्तर प्रदेश’ के विजन को साकार करते हुए, राज्य सरकार की निवेश एजेंसी ‘इन्वेस्ट यूपी’ और एएम ग्रुप (AM Group) के बीच एक विशाल समझौता (MoU) संपन्न हुआ है। इस परियोजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश अब वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर का नया केंद्र बनने जा रहा है।

2 लाख करोड़ का निवेश और दुनिया का सबसे बड़ा AI हब

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में 25 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 2 लाख करोड़ रुपये) का निवेश किया जाएगा। गुरुवार को यीडा के सीईओ राकेश कुमार सिंह ने एएम ग्रुप को 289 एकड़ भूमि के लिए ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ (LOI) भी सौंप दिया। यह हब यीडा के सेक्टर 28 और सेक्टर 8डी में विकसित किया जाएगा।

पूरी तरह ‘कार्बन-फ्री’ और अत्याधुनिक तकनीक

इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसका पर्यावरण के अनुकूल होना है। यह 1 गीगावॉट (GW) क्षमता का डेटा सेंटर पूरी तरह से 24×7 कार्बन-फ्री ऊर्जा (सौर, पवन और पम्प्ड स्टोरेज) से संचालित होगा। यह न केवल तकनीक, बल्कि स्थिरता (Sustainability) के मामले में भी दुनिया के लिए एक उदाहरण पेश करेगा।

तकनीकी रूप से यह हब 5 लाख हाई-परफॉर्मेंस चिपसेट्स से लैस होगा, जो इसे दुनिया के सबसे शक्तिशाली सुपरकंप्यूटिंग केंद्रों में से एक बना देगा। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में एआई और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC) की बढ़ती मांग को पूरा करना है।

रोजगार और विकास के नए द्वार

यह परियोजना केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी आर्थिक प्रभाव होंगे।

उच्च-कुशल रोजगार: इस हब के निर्माण से हजारों सॉफ्टवेयर डेवलपर्स, डेटा साइंटिस्ट और हार्डवेयर इंजीनियरों के लिए रोजगार के द्वार खुलेंगे।

विदेशी निवेश: इतने बड़े पैमाने पर एफडीआई (FDI) आने से राज्य की जीडीपी को भारी मजबूती मिलेगी।

आत्मनिर्भर एआई: इससे भारतीय डेवलपर्स को अत्याधुनिक चिपसेट्स तक आसान पहुंच मिलेगी, जिससे ‘मेड इन इंडिया’ एआई समाधानों को वैश्विक पहचान मिलेगी।

2030 तक पूर्ण संचालन का लक्ष्य

परियोजना को चरणों में पूरा किया जाएगा। लक्ष्य रखा गया है कि वर्ष 2028 तक इसके प्रथम चरण का संचालन शुरू हो जाए और 2030 तक यह अपनी पूरी 1 गीगावॉट की क्षमता हासिल कर ले। यह पहल निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश को दुनिया की डिजिटल अर्थव्यवस्था की अग्रिम पंक्ति में खड़ा कर देगी।

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