बलरामपुर में ‘वोटर लिस्ट’ पर मचा बवाल, बीएलओ ने खोला सत्ता के दबाव का कच्चा चिट्ठा; सपा ने दी चेतावनी
Sandesh Wahak Digital Desk: बलरामपुर जनपद में चल रहे मतदाता सूची के विशेष वृहद पुनरीक्षण कार्यक्रम ने अब एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है। समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया है कि जिले में प्रशासनिक मशीनरी और सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं के बीच एक ऐसा अपवित्र गठजोड़ बन गया है, जो विपक्षी मतदाताओं, विशेषकर पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग के लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटने का सुनियोजित प्रयास कर रहा है। मामला तब और गंभीर हो गया जब तुलसीपुर विधानसभा क्षेत्र के एक सरकारी कर्मचारी (बूथ लेवल ऑफिसर) ने खुद को सत्ता पक्ष के दबाव में बताते हुए उच्चाधिकारियों से सुरक्षा की गुहार लगाई।

बीएलओ रमेश शुक्ला ने एसडीएम को पत्र लिख कर खोली पोल
तुलसीपुर विधानसभा के भाग संख्या-16 के बीएलओ रमेश कुमार शुक्ला ने उपजिलाधिकारी को लिखित शिकायत भेजकर सनसनी फैला दी है। रमेश शुक्ला के अनुसार, बीती 28 जनवरी को सत्ताधारी दल के कुछ कार्यकर्ताओं ने उन पर भारी दबाव बनाया और लगभग 100 ‘फॉर्म-7’ (नाम विलोपन हेतु प्रयुक्त होने वाला फॉर्म) पर जबरन उनके हस्ताक्षर करा लिए। कर्मचारी का कहना है कि वह डर के कारण उस समय कुछ बोल नहीं सके, लेकिन अब उन्होंने लिखित रूप में विधिक कार्रवाई की मांग की है। इस घटना ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस मामले में पूर्व लोक सभा प्रत्याशी मसूद आलम खां ने समाजवादी पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं जे साथ जिला निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि जनपद के कई क्षेत्रों में बाहरी एजेंटों के माध्यम से बीएलओ पर दबाव बनाया जा रहा है ताकि फर्जी दस्तावेज तैयार कर विपक्षी समर्थकों के नाम काटे जा सकें। सपा का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया को गोपनीय रखने की कोशिश की जा रही है और फॉर्म-7 की सूचनाएं साझा नहीं की जा रही हैं।

सपा ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
वहीं, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधान परिषद प्रत्याशी डॉ. भानु त्रिपाठी ने प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए तीखा हमला बोला है। डॉ. त्रिपाठी ने कहा, “यह सीधे तौर पर लोकतंत्र की हमला है। जब एक सरकारी कर्मचारी खुद सुरक्षित नहीं है और उससे जबरन फॉर्म भरवाए जा रहे हैं, तो आम जनता के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा कौन करेगा? भाजपा सरकार चुनाव हारने के डर से अब अधिकारियों व कर्मचारियों के कंधे पर बंदूक रखकर चला रही है। हम किसी भी गरीब या वंचित मतदाता का नाम सूची से हटने नहीं देंगे।” उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित नहीं की, तो समाजवादी पार्टी पूरी ताकत के साथ सड़कों पर उतरेगी और इस मामले को चुनाव आयोग के मुख्यालय तक ले जाएगी।
लामबंद हुआ विपक्षी खेमा
वर्तमान में समाजवादी पार्टी ने मांग की है कि सभी बूथों पर भरे गए फॉर्म-7 की सूची सपा के बूथ लेवल एजेंटों (बूथ लेवल एजेंट) के साथ साझा की जाए और उन अधिकारियों को चिन्हित कर दंडित किया जाए जो सत्ता पक्ष के इशारे पर काम कर रहे हैं। फिलहाल, बीएलओ के इस शिकायत के बाद जिले के राजनीतिक गलियारों में ठंड के मौसम में गर्मी पैदा कर दी है और विपक्षी खेमा लामबंद हो रहा है। वहीं, इस मामले पर ना तो अभी तक भाजपा की कोई प्रतिक्रिया मिल सकी है और ना ही अभी चुनाव के कार्य से जुड़े किसी बड़े प्रशासनिक अधिकारी ने इस पर कोई बयान दिया है।
रिपोर्ट: योगेंद्र त्रिपाठी
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