यूपीसीडा का बड़ा कदम, 176 औद्योगिक क्षेत्रों में रखा अवसंरचना संतृप्ति का लक्ष्य

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। यूपीसीडा ने 176 औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक विस्तृत वर्चुअल समीक्षा एवं संवाद बैठक आयोजित की, जिसमें समयबद्ध विकास और निवेशक-अनुकूल प्रक्रियाओं पर ज़ोर दिया गया।

176 औद्योगिक क्षेत्रों में अवसंरचना का संतृप्ति लक्ष्य

यूपीसीडा ने अगले कुछ महीनों में प्रदेश के 176 औद्योगिक क्षेत्रों को मूलभूत सुविधाओं से पूरी तरह लैस (अवसंरचना संतृप्ति) करने का लक्ष्य रखा है। सड़क, ड्रेनेज/सीवरेज नेटवर्क, स्ट्रीट लाइटिंग, बिजली आपूर्ति, जलापूर्ति और नागरिक सुविधाओं का उन्नयन इसमें शामिल है। मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) ने अधिकारियों को स्थल-आधारित सर्वेक्षण कर एक सप्ताह के भीतर प्राथमिकता वाली परियोजनाओं की सूची प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

डिजिटल सुधार और निवेशक सेवाएं

सीईओ ने भूमि आवंटन, हस्तांतरण, उपविभाजन और भवन योजना अनुमोदन जैसी निवेशक सेवाओं को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर जोर दिया। यूपीसीडा ने निवेश मित्र 3.0 में कई नए फीचर्स जोड़े हैं, जिनमें ई-सेवाओं का पूर्ण एकीकरण, श्रम व पर्यावरण अनुमति प्रक्रियाओं का सरलीकरण, पूरी तरह स्वचालित ऑटो-अलॉटमेंट और ई-नीलामी प्रणाली शामिल हैं। इन डिजिटल सुधारों का लक्ष्य प्रक्रियाओं में शून्य मानवीय हस्तक्षेप और रियल-टाइम ट्रैकिंग के माध्यम से पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी

अवसंरचना परियोजनाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था बनाई गई है। गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु RITES को थर्ड-पार्टी सत्यापन एजेंसी के रूप में नियुक्त किया गया है। यूपीसीडा के वरिष्ठ अधिकारी औद्योगिक क्षेत्रों का चरणबद्ध निरीक्षण करेंगे। कचरा प्रबंधन, ड्रेनेज और सफाई के लिए AMC (वार्षिक रखरखाव अनुबंध) ढांचे को मानकीकृत KPIs (प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों) और उद्योग संगठनों के फीडबैक के आधार पर आधुनिक बनाया जा रहा है।

भूमि बैंक और नीतिगत जागरूकता

यूपीसीडा ने उपलब्ध भूमि बैंक के इष्टतम और उत्पादक उपयोग को प्राथमिकता दी है। उच्च-संभावना वाले उद्योगों (High-Potential Industries) और नवउभरते सेक्टरों के लिए तेज आवंटन पर बल दिया गया है। साथ ही, लॉजिस्टिक्स नीति 2024, MSME व ODOP प्रोत्साहन जैसी औद्योगिक नीतियों को लेकर व्यापक जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए गए।

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