अमेरिकी कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, गलत तरीके से डिपोर्ट किए गए भारतीय को वापस बुलाने का आदेश

Sandesh Wahak Digital Desk: टेक्सास की एक संघीय अदालत ने अमेरिकी आव्रजन विभाग (ICE) को कड़ी फटकार लगाते हुए एक भारतीय नागरिक, फ्रांसिस्को डी’कोस्टा को वापस अमेरिका लाने का आदेश दिया है। अदालत ने माना कि डी’कोस्टा को भारत भेजना न केवल गैर-कानूनी था, बल्कि यह सीधे तौर पर न्यायिक अधिकारों का अपमान था।

फ्रांसिस्को डी’कोस्टा साल 2009 से अमेरिका में रह रहे थे। अक्टूबर 2025 में एक आव्रजन जज ने उन्हें खुद से देश छोड़ने को कहा था, लेकिन इसी बीच उन्होंने एक नई याचिका दायर की। डी’कोस्टा ने दावा किया कि उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया है और भारत वापस जाने पर उन्हें अपनी जान का खतरा है। मामला तब बिगड़ा जब 20 दिसंबर 2025 को उन्हें जबरन फ्लाइट में बिठाकर भारत भेज दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि उन्हें हटाने से ठीक 3 घंटे पहले कोर्ट ने उनके डिपोर्टेशन पर स्टे (रोक) लगा दिया था।

सरकार की लापरवाही पर कोर्ट की फटकार

सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि सरकारी वकीलों और आव्रजन अधिकारियों को फ्लाइट छूटने से पहले ही कोर्ट के स्टे ऑर्डर की जानकारी मिल चुकी थी। इसके बावजूद उन्हें तुर्किश एयरलाइंस की फ्लाइट से रवाना कर दिया गया। जज ने सरकार की उस दलील को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें इसे अनजाने में हुई गलती बताया गया था। कोर्ट ने कहा कि कारण चाहे जो भी हो, स्टे के बाद निकाला जाना पूरी तरह अवैध है। सरकार ने तर्क दिया कि डी’कोस्टा भारत से भी केस लड़ सकते हैं, लेकिन कोर्ट ने कहा कि न्याय तभी होगा जब उन्हें उसी स्थिति में वापस लाया जाए, जिसमें वे निकाले जाने से पहले थे।

अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि गलत तरीके से हटाए गए विदेशी नागरिक को वापस बुलाना ही सही कानूनी उपाय है। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि वह डी’कोस्टा की जल्द से जल्द अमेरिका वापसी का इंतजाम करे और अगले 5 दिनों के भीतर इसकी पूरी कार्ययोजना अदालत के सामने पेश करे।

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