दुनिया के 160 देशों में तैनात 1 लाख से ज्यादा अमेरिकी सैनिक, ईरान से जंग के बीच पेंटागन ने दिखाई ताकत
Sandesh Wahak Digital Desk: दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ते युद्ध के खतरों के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य उपस्थिति को व्यापक रूप दे दिया है। वर्तमान में 1,08,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक दुनिया के 160 देशों में या तो तैनात हैं या मोर्चे पर मौजूद हैं। पेंटागन के शीर्ष अधिकारियों ने सीनेट में गवाही देते हुए साफ किया कि अमेरिकी सेना एक साथ कई मोर्चों पर लड़ने और दुश्मनों को रोकने में पूरी तरह सक्षम है।
अमेरिकी सेना के वाइस चीफ जनरल क्रिस्टोफर लानेव ने बताया कि मिडिल ईस्ट में तैनात सैनिक इस वक्त बेहद खतरनाक माहौल में काम कर रहे हैं। वे न केवल अमेरिका के हितों की रक्षा कर रहे हैं, बल्कि ईरान और उसके सहयोगियों द्वारा दागी जा रही मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर रहे हैं। लानेव के मुताबिक, अमेरिकी बल वहां के जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा के साथ-साथ रसद, गोला-बारूद और मेडिकल सपोर्ट की सप्लाई चेन को भी बनाए हुए हैं।
समुद्र से अंतरिक्ष तक चौकसी
नौसेना (Navy): एडमिरल जेम्स किल्बी ने बताया कि अमेरिकी नेवी मिडिल ईस्ट के साथ-साथ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र (हिंद-प्रशांत) में भी डटी हुई है। नेवी का लक्ष्य है कि उसके 80 प्रतिशत युद्धपोत, विमान और पनडुब्बियां हर वक्त हमले के लिए तैयार रहें। इसके लिए शिपयार्डों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।
वायुसेना (Air Force): जनरल जेम्स लामोंटेग्ने ने जानकारी दी कि एयर फोर्स हर साल 1,500 नए पायलटों को ट्रेनिंग दे रही है। साथ ही, बी-21 बॉम्बर जैसे आधुनिक विमानों को बेड़े में शामिल किया जा रहा है।
स्पेस फोर्स (Space Force): आधुनिक युद्ध अब अंतरिक्ष तक पहुँच गया है। जनरल माइकल गुएटलीन ने बताया कि नेविगेशन और मिसाइल चेतावनी के लिए नए उपग्रह लॉन्च किए गए हैं, ताकि अंतरिक्ष से भी दुश्मन की हर हरकत पर नजर रखी जा सके।
चीन और रूस पर विशेष नजर
मरीन कॉर्प्स के अधिकारियों ने सीनेट को बताया कि उनकी सेना दुनिया के किसी भी हिस्से में ‘क्विक रिस्पॉन्स’ देने के लिए तैयार है। खासकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती दादागिरी को रोकने के लिए मरीन कॉर्प्स लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
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