अमेरिका ने तोड़ा WHO से नाता, ट्रंप प्रशासन बोला- हमें अब इस अक्षम संस्था की जरूरत नहीं
Sandesh Wahak Digital Desk: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पद संभालते ही अपनी अमेरिका फर्स्ट नीति पर मुहर लगा दी है। अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की अपनी सदस्यता खत्म कर दी है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कदम उन वादों को पूरा करने के लिए उठाया गया है जो उन्होंने चुनाव के दौरान जनता से किए थे।
विदेश मंत्री मार्को रुबियो और स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्ट एफ केनेडी जूनियर ने एक साझा बयान जारी कर इस फैसले की वजहें बताईं।
कोविड-19 की विफलता: अमेरिका का आरोप है कि महामारी के दौरान WHO समय पर सटीक जानकारी देने में नाकाम रहा, जिसका खामियाजा अमेरिकी जनता को भुगतना पड़ा।
विरोधी देशों का प्रभाव: प्रशासन का दावा है कि WHO अब अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है और उस पर अमेरिका के विरोधी देशों का राजनीतिक प्रभाव बढ़ गया है।
फंडिंग का मुद्दा: अमेरिका इस संस्था का सबसे बड़ा वित्तीय मददगार (डोनेट करने वाला) रहा है, फिर भी उसके हितों की अनदेखी की गई।
विदाई के वक्त भी बढ़ा तनाव
बयान में एक चौंकाने वाला दावा भी किया गया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि वापसी के फैसले के बाद WHO का व्यवहार अपमानजनक रहा। आरोप है कि संगठन ने अपने मुख्यालय से अमेरिकी झंडा उतारकर सौंपने से इनकार कर दिया और यह भी कहा कि उसने अमेरिका की वापसी को मंजूरी नहीं दी है।
WHO को दी जाने वाली सभी अमेरिकी मदद और वहां तैनात स्टाफ की सेवाएं तुरंत प्रभाव से खत्म कर दी गई हैं। अब अमेरिका वैश्विक स्वास्थ्य के लिए किसी संस्था के बजाय सीधे देशों के साथ द्विपक्षीय (Bilateral) समझौते करेगा। ट्रंप प्रशासन ने इस फैसले को उन लोगों को समर्पित किया है जिन्होंने महामारी में अपनों को खोया या जिनका कारोबार पाबंदियों की वजह से बर्बाद हो गया।

