यूपी की अर्थव्यवस्था को मिलेगा ‘शराब’ उद्योग का बूस्टर डोज, ISWAI की रिपोर्ट में हुआ खुलासा
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में अब एल्कोबेव (शराब) उद्योग भी अपना अहम योगदान देगा। इंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाईन्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ISWAI) ने आज उत्तर प्रदेश के एल्कोबेव उद्योग पर अपनी पहली व्यापक रिपोर्ट बिल्डिंग पाथवेज फॉर फ्यूचर इन्वेस्टमेंट्स एंड ग्रोथ: अल्कोहलिक बेवरेज इंडस्ट्री इन उत्तर प्रदेश जारी की। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि यह उद्योग न केवल राजस्व जुटाने में मदद कर रहा है, बल्कि रोजगार, पर्यटन और समग्र आर्थिक विकास को भी बढ़ावा दे रहा है।
क्या कहते हैं मंत्री नितिन अग्रवाल
इस महत्वपूर्ण रिपोर्ट के लॉन्च पर उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री (आबकारी) नितिन अग्रवाल ने कहा, उत्तर प्रदेश सरकार आर्थिक विकास और जन कल्याण के लिए एक प्रगतिशील और पारदर्शी आबकारी प्रणाली बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने ISWAI यूपी इकोनॉमिक रिपोर्ट 2025 की सराहना करते हुए कहा कि यह रिपोर्ट रोजगार सृजन से लेकर ग्रामीण विकास और पर्यटन तक, इस उद्योग के बहु-आयामी योगदान को दर्शाती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह अध्ययन भविष्य की नीतियों को आकार देने में सहायक होगा, जिससे उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का सपना साकार हो सकेगा।

आंकड़ों में उद्योग का योगदान
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में यूपी के एल्कोबेव उद्योग ने राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 2.4 फीसदी का योगदान दिया, जो 56,000 करोड़ रुपये का मार्केट रेवेन्यू था। यह उद्योग कृषि, निर्माण, पैकेजिंग, आतिथ्य, लॉजिस्टिक्स और खुदरा क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण 5.3 लाख से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान करता है।
रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु
राजस्व में हिस्सेदारी: उत्तर प्रदेश में होने वाले कुल टैक्स कलेक्शन का 25% हिस्सा एल्कोहलिक बेवरेजेस से आता है।
रोजगार के अवसर
राज्य के 27,308 शराब खुदरा आउटलेट 1.3 लाख लोगों को नौकरियां देते हैं।
शराब परोसने वाले लाइसेंसी फूड एंड बेवरेज (F&B) संस्थानों की 14-19% कमाई शराब की बिक्री से होती है और ये 50,000 से अधिक लोगों को रोजगार देते हैं।
पेय पदार्थों के उत्पादन के लिए अनाज और गन्ने की खरीद से 3.4 लाख से अधिक किसानों को सीधा लाभ मिलता है।
स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा: यह उद्योग फिरोजाबाद की कांच अर्थव्यवस्था में भी जबरदस्त योगदान देता है, शहर में कंटेनर ग्लास आउटपुट के 80% हिस्से की खपत इसी सेक्टर में होती है।
पर्यटन को प्रोत्साहन: यूपी की आबकारी नीति 2025-26 पर्यटन विभाग के साथ साझेदारी में वाइनरी और माइक्रो-ब्रेवरीज की स्थापना के जरिए शराब-पर्यटन को बढ़ावा देती है।
प्रीमियम उत्पादों की मांग: इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) सेगमेंट में वॉल्यूम में सालाना 10% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो उपभोक्ताओं के प्रीमियम उत्पादों की ओर बढ़ते रुझानों को दर्शाता है।
आबकारी आयुक्त की टिप्पणी
उत्तर प्रदेश सरकार के आबकारी आयुक्त, डॉ. आदर्श सिंह (आईएएस) ने कहा, पिछले कुछ सालों के दौरान उत्तर प्रदेश ने आबकारी क्षेत्र में बड़े और प्रगतिशील सुधार किए हैं। उन्होंने पारदर्शिता अपनाने, पारंपरिक एकाधिकार को खत्म करने, डिजिटल प्रशासन और प्रतिस्पर्धी एवं निवेशक-अनुकूल वातावरण को बढ़ावा देकर दीर्घकालिक मूल्य सृजन की मजबूत नींव तैयार करने की बात कही। उन्होंने ISWAI के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि रिपोर्ट में दिए गए तथ्य नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के हितधारकों और निवेशकों के लिए बेहद फायदेमंद होंगे।

ISWAI का दृष्टिकोण
ISWAI के सीईओ, संजीत पाधी ने कहा कि यह उद्योग राज्य को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा, उत्तर प्रदेश एक आर्थिक पावरहाउस के रूप में बदल रहा है और अल्कोहलिक बेवरेज सेक्टर इस यात्रा में एक महत्वपूर्ण भागीदार है। उन्होंने जोर दिया कि अनुकूल नीतियों और प्रशासन के माध्यम से प्रदेश प्रीमियम पेय पदार्थों के निर्माण और पर्यटन का केंद्र बन सकता है।
पाधी ने आगे कहा, यह रिपोर्ट दर्शाती है कि जिम्मेदार और विनियमित शराब नीतियां न केवल राजस्व की दृष्टि से, बल्कि आजीविका, कृषि और पर्यटन में भी योगदान देकर राज्य के 24 करोड़ नागरिकों के समग्र विकास को सुनिश्चित कर सकती हैं। ISWAI उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि यह सेक्टर लगातार फलता-फूलता रहे और प्रदेश के समावेशी एवं स्थायी विकास में योगदान दे सके।
भविष्य के लिए सुझाव
यह रिपोर्ट प्रीमियम उत्पादों के लिए टैक्स को युक्तिसंगत बनाने, खुदरा पहुंच का विस्तार करने, निर्यात के लिए समर्थन और नियामक प्रणाली में डिजिटलीकरण के माध्यम से कारोबार की सुगमता सुनिश्चित करने जैसी नीतिगत पहलों का भी आह्वान करती है।
उत्तर प्रदेश ने 2028 तक 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में ISWAI की यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि अल्कोहलिक बेवरेज उद्योग दीर्घकालिक और स्थायी आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में कैसे एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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