उत्तर प्रदेश ग्राम सचिवों का विरोध, ‘ऑनलाइन उपस्थिति’ और 10 सूत्रीय मांगों पर सौंपा ज्ञापन

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश ग्राम पंचायत अधिकारी संघ और ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश के बैनर तले सिद्धार्थनगर जनपद के नौगढ़ विकास खंड परिसर में ग्राम विकास अधिकारियों और ग्राम सचिवों ने विरोध प्रदर्शन किया। शुक्रवार को उन्होंने मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ को संबोधित एक अनुरोध ज्ञापन खंड विकास अधिकारी (BDO) नौगढ़ और जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा।

ज्ञापन में ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली लागू करने सहित विभिन्न समस्याओं पर प्रभावी निर्णय लेने की मांग की गई है, साथ ही यह भी अनुरोध किया गया है कि बिना समुचित संसाधन उपलब्ध कराए अन्य विभागों के कार्य न लिए जाएं।

सचिवों की 10 प्रमुख मांगें और समस्याएं

क्षेत्रीय ग्राम सचिवों ने अपनी कार्य प्रकृति और विभिन्न समस्याओं को सामने रखते हुए 10 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अनुरोध किया है:

क्र.सं. प्रमुख समस्या/मांग विवरण
1.

ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली का विरोध

यह प्रणाली क्षेत्र/फील्ड-आधारित कार्य प्रकृति के अनुकूल नहीं है। कार्यालय अध्यक्षों (BDO, DM) के लिए ऐसी उपस्थिति का कोई प्रचलन नहीं है, अतः समस्त स्तरों पर समान उपस्थिति व्यवस्था होनी चाहिए।
2.

अव्यवहारिक उपस्थिति

एक सचिव के पास सामान्यतः 4 से 9 ग्राम पंचायतों का प्रभार होता है। क्षेत्रीय भौगोलिक कारणों से किसी एक निश्चित स्थान और समय पर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना संभव नहीं है।
3.

निजी फ़ोन और निजता का उल्लंघन

वर्तमान में सचिव अपने व्यक्तिगत मोबाइल का उपयोग कर रहे हैं। ऑनलाइन उपस्थिति के लिए किसी थर्ड पार्टी ऐप को फोन का एक्सेस देना ‘निजता के मौलिक अधिकार’ का उल्लंघन होगा और डेटा चोरी/साइबर फ्रॉड का जोखिम पैदा करेगा।
4.

शैक्षिक योग्यता और वेतनमान में वृद्धि

ग्राम पंचायत अधिकारी/ग्राम विकास अधिकारी की शैक्षिक योग्यता को इंटरमीडिएट से बढ़ाकर स्नातक (Graduation) किया जाए और उसके अनुरूप वेतन मैट्रिक्स 5 में स्थापित किया जाए।
5.

वाहन और मोबाइल भत्ता

ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्राम विकास अधिकारी को वाहन भत्ता, मोबाइल फोन तथा CUG सिम (सरकारी सिम) उपलब्ध कराया जाए।
6.

पदोन्नति में विसंगति दूर करना

सहायक विकास अधिकारी (ISB) और सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को भी सहायक विकास अधिकारी (सहकारिता/सांख्यिकी) के समान ग्रेड वेतन 4200 में पदस्थापित किया जाए।
7.

स्थानांतरण नीति में सुधार

संवर्ग के कार्मिकों को उनकी भाषा, शैली, परम्परा और मनोविज्ञान से भिज्ञ जनपदों में ही स्थानांतरित/तैनात करने का आदेश दिया जाए ताकि ग्रामीण योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावी रहे।
8.

ऑडिट व्यवस्था में बदलाव

ग्राम पंचायतों की ऑडिट जिला लेखा परीक्षक/पंचायत समिति के स्थान पर चार्टर्ड एकाउंटेंट (CA) / सोशल ऑडिटर से कराने का वैकल्पिक प्रावधान उपलब्ध कराया जाए, ताकि शोषण को रोका जा सके।
9.

मनरेगा वसूली में न्याय

मनरेगा में शासकीय क्षति की वसूली केवल सचिव से न करके, संयुक्त डिजिटल सिग्नेचरी होने के कारण उत्तरदायी खंड विकास अधिकारी (BDO) और लेखाकार से भी समानुपातिक रूप से निर्धारित की जाए।
10.

अतिरिक्त कार्यों का बोझ

ग्राम सचिव वर्तमान में 29 से अधिक विभागीय कार्यों (मनरेगा, आवास योजना, पेयजल, जन्म/मृत्यु पंजीकरण, फैमिली आईडी सत्यापन आदि) का संपादन कर रहे हैं, जो कार्यक्षमता को प्रभावित करता है।

संघ ने अंत में सरकार से अनुरोध किया है कि इन समस्याओं पर विचार करते हुए संघ के प्रतिनिधियों के साथ संवाद स्थापित कर न्यायपूर्ण एवं तर्कसंगत व्यवस्था के तहत व्यावहारिक समाधान निकाला जाए।

इस अवसर पर ग्राम पंचायत अधिकारी/.ग्राम विकास अधिकारी नौगढ़ सिद्धार्थनगर,अभिनव ओझा, सचिव कलीमुज्जफर, अंबुजा जायसवाल, स्वप्निल श्रीवास्तवा ,ज्योति पाण्डेय , प्रीति गुप्ता, वसीकुर्रहमान, आशीष पाण्डेय,विमल कांत, कुमारी मिथलेश, अमित कुमार जायसवाल सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

रिपोर्ट: जाकिर खान

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