Varanasi News: राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख ने अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान का किया दौरा

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख ने अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आईसार्क), वाराणसी का आधिकारिक दौरा किया।

इस अवसर पर उनके साथ हरपाल सिंह जग्गी (पूर्व वीसी, पंजाबी अकादमी उत्तर प्रदेश एवं अध्यक्ष गुरुद्वारा सदर लखनऊ), सुरेंद्र सिंह बक्शी (सचिव, गुरुद्वारा नखास हिंडोला एवं अध्यक्ष सरहिंद सिख मिशन), संयुक्त कृषि निदेशक वाराणसी मंडल शैलेंद्र कुमार, उप कृषि निदेशक अमित जायसवाल तथा जिला कृषि अधिकारी संगम सिंह भी मौजूद रहे।

आईसार्क निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह और संस्थान के वैज्ञानिकों ने मंत्री सहित अतिथियों का स्वागत किया।

दौरे के दौरान मंत्री ने सबसे पहले ग्रीन हाउस गैस (जीएचजी) प्लॉट्स का निरीक्षण किया, जहां धान की खेती से निकलने वाले उत्सर्जन को मापने और कम करने पर शोध हो रहा है।

इसके बाद उन्होंने रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर (पुनर्योजी कृषि) से जुड़े शोध कार्यों को देखा, जो मिट्टी की सेहत सुधारने और खेती को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मंत्री ने कृषि उपकरण शाला में आधुनिक कृषि मशीनों का प्रदर्शन देखा और स्पीडब्रीड सुविधा का भी दौरा किया, जहां तेजी से नई एवं उन्नत धान की किस्में विकसित की जा रही हैं। इसके बाद उन्होंने संस्थान की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का अवलोकन किया—

जीआईएस लैब: भू-स्थानिक तकनीक से कृषि योजना और संसाधन प्रबंधन।
कंप्यूटेशनल बायोलॉजी लैब: धान की जैव प्रौद्योगिकी से जुड़ी प्रगति।
पौध एवं मृदा प्रयोगशाला: मिट्टी की गुणवत्ता और पौध परीक्षण की आधुनिक तकनीक।

उन्होंने सर्वा (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन राइस वैल्यू एडिशन) का भी भ्रमण किया, जहां धान की गुणवत्ता परीक्षण, भारी धातुओं की पहचान और मूल्यवर्धित उत्पादों पर शोध कार्य हो रहा है।

साथ ही, मंत्री ने एजुकेशन टेक्नोलॉजी स्टूडियो का भी अवलोकन किया, जहां किसानों, छात्रों और कृषि प्रसार अधिकारियों के लिए डिजिटल प्रशिक्षण सामग्री और ई-लर्निंग मॉड्यूल तैयार किए जाते हैं।

दौरे के अंत में मंत्री ने वैज्ञानिकों और स्टाफ से बातचीत की तथा आईसार्क में हो रहे अनुसंधान व नवाचारों की सराहना की।

उन्होंने कहा— यहां विकसित समाधानों को सीधे किसानों तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि उनकी उत्पादकता और आय में वृद्धि हो सके। आईसार्क ने बहुत ही कम समय में धान अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बनने की उपलब्धि हासिल की है।

यहां कार्यरत विशेषज्ञों की विविधता, पेशेवर क्षमता और समर्पण राज्य की भावना को दर्शाती है। यह देखकर मैं उत्साहित हूं कि यह संस्थान भारतीय कृषि के स्थाई भविष्य की दिशा में सशक्त भूमिका निभा रहा है।”

मंत्री ने संस्थान से आग्रह किया कि वह स्थानीय साझेदारों के साथ मिलकर किसानों की भलाई के लिए कार्य जारी रखे।

रिपोर्ट – मदन मुरारी पाठक

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