भगवा चोला छोड़ेंगी वायरल साध्वी Harsha Richharia
Sandesh Wahak Digital Desk: मकर संक्रांति के पावन अवसर पर हर्षा रिछारिया (Harsha Richharia) मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित ग्वारीघाट पहुंचीं जहां उन्होंने मां नर्मदा में आस्था की डुबकी लगाई। साध्वी का चोला त्यागने से पहले उन्होंने मां नर्मदा के तट पर खड़े होकर पूजा अर्चना की और फिर स्नान किया। इसके बाद उन्होंने कहा कि जबलपुर संस्कारधानी है और मां नर्मदा से उनका बहुत पुराना और गहरा रिश्ता है। इस पावन अवसर पर मां नर्मदा के तट पर आकर डुबकी लगा पाना उनके लिए अत्यंत सौभाग्य की बात है।
एक साल का संघर्ष और मानसिक पीड़ा
डुबकी लगाते समय उनकी आंखों में आंसू देखे गए जिस पर उन्होंने बताया कि यह दिल और मन का दर्द है जो उन्हें अपने ही धर्म से मिला है। उन्होंने कहा कि धर्म का प्रचार करना और उसमें आगे बढ़ना छोड़ने का फैसला लेना अपने आप में बहुत बड़ी बात है। जब कोई इंसान इस हद तक पहुंच जाता है तो यह एक गहरे मानसिक संघर्ष का संकेत होता है।
हर्षा रिछारिया (Harsha Richharia) ने कहा कि इस सफर में उन्होंने लगातार विरोध, परेशानियों और कठिनाइयों का सामना किया है। उन्होंने बताया कि जिनसे आशीर्वाद की अपेक्षा होती है वही लोग जब बार बार विरोध करते हैं और उनके कामों को आगे बढ़ने से रोकते हैं तो यह बेहद पीड़ादायक होता है। उन्होंने कहा कि इस सफर को एक साल हो गया है और इस एक साल में उन्होंने मेंटल प्रेशर, मेंटल टॉर्चर, पैनिक अटैक, एंग्जायटी, लो बीपी, माइग्रेन अटैक और सुसाइडल थॉट्स जैसी समस्याएं झेली हैं। यह एक साल उनके लिए एक सदी के बराबर रहा है और उनके परिवार पर भी इसका गहरा असर पड़ा है।

“युवाओं के धर्म प्रचार से कुछ गुरु असहज”
हर्षा (Harsha Richharia) ने कहा कि आज का युवा क्लब और नशे की तरफ न जाकर काशी, मथुरा, वृंदावन और अयोध्या जैसे धार्मिक स्थलों की ओर बढ़ रहा है जो गर्व की बात है। लेकिन जब युवा धर्म के प्रचार में आगे बढ़ने लगता है तो कुछ गुरुओं को यह स्वीकार नहीं होता। उन्होंने सवाल उठाया कि मंच से नारी सम्मान और धर्म परिवर्तन की बातें करने वाले वही लोग एक लड़की को आगे बढ़ता हुआ क्यों नहीं देखना चाहते।
हर्षा रिछारिया (Harsha Richharia) ने स्पष्ट कहा कि उन्हें अपने पुराने जीवन पर कोई शर्मिंदगी नहीं है। उन्होंने गर्व से कहा कि वह एंकर और एक्टर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज कई ऐसी एक्ट्रेसेज हैं जिन्हें धार्मिक मंचों पर बुलाया जाता है लेकिन उनके निजी जीवन पर सवाल नहीं उठते जबकि एक ब्राह्मण लड़की जो सही रास्ते पर चल रही है उसका विरोध किया जाता है।

हिंदू राष्ट्र की मांग पर सवाल
उन्होंने कहा कि कैमरे के सामने लोग समर्थन करते हैं लेकिन कैमरा बंद होते ही वही लोग विरोध पर उतर आते हैं। उन्होंने कहा कि वह अपना धर्म नहीं छोड़ रही हैं और न ही बदल रही हैं बल्कि केवल धर्म का प्रचार बंद कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह युवाओं और बेटियों से आगे बढ़ने के लिए कैसे कहें जब खुद उनका मनोबल टूट रहा है।
हर्षा (Harsha Richharia) ने कहा कि सिर्फ बोलने से हिंदू राष्ट्र नहीं बनता। उन्होंने कहा कि जिन आदर्शों की पूजा की जाती है उनके जीवन के आचरण को अपनाना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ते हुए युवाओं को रोककर भविष्य में हिंदू राष्ट्र की कल्पना साकार नहीं की जा सकती।

ट्रोल करने वालों को चेतावनी
सोशल मीडिया पर हो रही ट्रोलिंग को लेकर उन्होंने कहा कि यदि उनके चरित्र पर उंगली उठाई गई तो वह कोर्ट में खड़े नजर आएंगे। उन्होंने कहा कि इस बार वह किसी को बर्दाश्त नहीं करेंगी।
हर्षा रिछारिया (Harsha Richharia) ने बताया कि वह 17 तारीख को प्रयागराज पहुंचेंगी और 18 तारीख को मौनी अमावस्या के दिन संगम में आस्था की डुबकी लगाएंगी। इसके बाद वह अपने इस प्रचार प्रसार को विराम देंगी और उस जीवन में लौटेंगी जहां उन्हें अधिक सुकून मिलता था। उन्होंने कहा कि वह सनातनी हैं और भगवा पहनना, तिलक और चंदन लगाना उनका अधिकार है जिसे कोई उनसे नहीं छीन सकता। मौनी अमावस्या के बाद लोग उन्हें एक नए तरीके से देखेंगे।
Also Read: लखनऊ नगर निगम का बड़ा एक्शन: जोन-7 में टैक्स न भरने वाली 52 दुकानें सील

