मलिहाबाद पुलिस की सुस्ती या कुछ और? तीन महीने बाद कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई महिला की FIR
Sandesh Wahak Digital Desk: राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद थाना क्षेत्र में पुलिस की संवेदनहीनता का एक बड़ा उदाहरण देखने को मिला है। ग्राम घुसौली की एक महिला ने आरोप लगाया है कि दबंगों ने न केवल उसके घर में घुसकर मारपीट की, बल्कि उसकी मर्यादा को भी ठेस पहुंचाई। हैरानी की बात यह है कि पुलिस के चक्कर काटने और आला अधिकारियों से गुहार लगाने के बाद भी जब सुनवाई नहीं हुई, तो महिला को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
क्या थी वह खौफनाक रात?
घटना पिछले साल 26 नवंबर 2025 की है। महिला का आरोप है कि गांव के ही राजेश, रामबाबू, रामविलास, शैलेंद्र, रवि और पुष्पेंद्र अवैध कट्टों, लाठी-डंडों और लोहे की सरिया से लैस होकर उसके घर में घुस आए। इन लोगों ने महिला, उसके पति और बच्चों को बेरहमी से पीटा।
महिला ने अपनी शिकायत में रोंगटे खड़े कर देने वाले आरोप लगाए हैं। आरोप है कि आरोपियों ने उसकी बेटी के कपड़े फाड़ दिए और महिला के गले से सोने की चेन छीन ली। महिला का आरोप है कि रामविलास नामक आरोपी ने उसके गुप्तांगों पर लात मारी, जिससे वह असहनीय पीड़ा से तड़प उठी। हालत इतनी बिगड़ गई कि डॉक्टरों ने उसे मलिहाबाद CHC से बलरामपुर अस्पताल रेफर कर दिया, जहां वह कई दिनों तक भर्ती रही।
पुलिस की चौखट से कोर्ट की दहलीज तक
पीड़िता ने अस्पताल से निकलते ही 28 नवंबर को थाने में तहरीर दी। इसके बाद उसने पुलिस आयुक्त (कमिश्नर) को पत्र लिखा और रजिस्टर्ड डाक के जरिए भी न्याय की मांग की। लेकिन मलिहाबाद पुलिस ने एक महीने तक मामले में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। हार मानकर महिला ने 2 दिसंबर को कोर्ट की शरण ली। अब, घटना के करीब तीन महीने बीत जाने के बाद कोर्ट के कड़े आदेश पर पुलिस ने मंगलवार को सभी छह आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
अब पुलिस की साख दांव पर
क्षेत्र में चर्चा का विषय यह है कि जो पुलिस एक महीने तक तहरीर मिलने के बाद भी हाथ पर हाथ धरे बैठी रही, वह अब कोर्ट के दबाव में दर्ज हुई FIR पर कितनी निष्पक्षता से जांच करेगी? क्या उन दबंगों की गिरफ्तारी होगी जिन्होंने एक परिवार को लहूलुहान कर दिया था?
रिपोर्ट : सुरेंद्र कुमार (शेरा वर्मा)
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