‘पैसा मिल गया है… इसे गोल्ड में बदल देना’, झांसी CGST घूसकांड में महिला IRS समेत 5 गिरफ्तार

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के झांसी में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक बड़े भ्रष्टाचार सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। सीजीएसटी (CGST) विभाग की डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी (IRS) और उनके मातहत अधिकारियों को 70 लाख रुपये की रिश्वत लेते और साठगांठ करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई ने विभाग के भीतर चल रहे ‘बोगस फर्म’ और ‘टैक्स चोरी’ के काले खेल को उजागर कर दिया है।

“गोल्ड में बदल देना”: कॉल रिकॉर्डिंग ने खोला राज

सीबीआई की जांच में अधिकारियों के बीच हुई बातचीत के चौंकाने वाले अंश सामने आए हैं। रिश्वत की रकम मिलने के बाद एक अधीक्षक ने डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी को फोन कर कहा “मैडम पैसा मिल गया है।” महिला अफसर का जवाब: फोन के दूसरी ओर से डिप्टी कमिश्नर ने निर्देश दिया। “ठीक है, इसे गोल्ड (सोने) में बदलकर दे देना।”

सीबीआई ने अधिकारियों के मोबाइल जब्त कर लिए हैं, जिनमें पैसों के लेनदेन से जुड़ी कई व्हाट्सएप चैट और रिकॉर्डिंग्स मिली हैं। इन्ही साक्ष्यों के आधार पर महिला IRS अफसर की गिरफ्तारी को हरी झंडी दी गई।

गिरफ्तार किए गए आरोपी

सीबीआई (लखनऊ यूनिट) ने इस मामले में कुल 5 लोगों को गिरफ्तार किया है।

प्रभा भंडारी: डिप्टी कमिश्नर, CGST (IRS अधिकारी)

अजय चंद्र शर्मा: अधीक्षक (Superintendent)

अनिल तिवारी: अधीक्षक (Superintendent)

नरेश गुप्ता: सीजीएसटी अधिवक्ता (एडवोकेट)

स्थानीय व्यापारी: झोकनबाग स्थित हार्डवेयर स्टोर का मालिक (बिचौलिया)

घोटाले की जड़: 100 करोड़ की टैक्स चोरी और 17 बोगस फर्म

यह कार्रवाई पिछले महीने झांसी मंडल में पकड़ी गई 17 बोगस फर्मों से जुड़ी है। जांच में सामने आया है कि विजय ट्रेडर्स, डीके इंटरप्राइजेज और आरके इंटरप्राइजेज जैसी फर्मों का पंजीकरण बिना किसी विभागीय जांच के फर्जी दस्तावेजों (पैन, आधार और बिजली बिल) के आधार पर कर दिया गया।

इन फर्जी फर्मों के जरिए कागजों पर खरीद-बिक्री दिखाकर करीब 25 करोड़ रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लेनदेन किया गया। झांसी, दतिया और सागर की करीब डेढ़ दर्जन स्टील कंपनियां (जैसे कामधेनु, के-2 ब्रांड, मीनाक्षी मेटल) कच्चे बिलों के जरिए 100 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी के रडार पर थीं। इन्हीं मामलों को रफा-दफा करने के लिए 70 लाख की रिश्वत मांगी गई थी।

झांसी से महाराष्ट्र तक फैला नेटवर्क

झांसी परिक्षेत्र में कुल 71,861 फर्म पंजीकृत हैं। सीबीआई की छानबीन में पता चला है कि इस रैकेट के तार केवल झांसी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मुरादाबाद, लखनऊ, महाराष्ट्र और गुजरात तक जुड़े हैं। फर्जी फर्मों का जाल बिछाकर सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत लगाई जा रही थी।

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