‘कहां-कहां जिला बदर करोगे?’, लखनऊ पहुंचे सस्पेंडेड PCS अलंकार अग्निहोत्री के तेवर सख्त
Sandesh Wahak Digital Desk: बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट और चर्चित पीसीएस (PCS) अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। शासन द्वारा उन्हें बरेली से हटाकर लखनऊ भेजे जाने के बाद, अलंकार ने सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया है। उनके ताज़ा पोस्ट और व्हाट्सएप स्टेटस ने प्रशासन के उस दावे की हवा निकाल दी है, जिसमें कहा गया था कि वे ‘स्वेच्छा’ से लखनऊ गए हैं।
सोशल मीडिया पर ‘अनऑफिशियल जिला बदर’ का तंज
बुधवार शाम जब अलंकार लखनऊ के आलमबाग स्थित स्नेह नगर पहुंचे, तो उन्होंने एक के बाद एक कई पोस्ट किए। उन्होंने शासन को सीधे चुनौती देते हुए लिखा “कहां-कहां आप मुझको जिला बदर करोगे.. जहां जाएंगे कारवां बढ़ता जाएगा।” साथ ही उन्होंने व्हाट्सएप ग्रुप्स पर संदेश साझा किया “अनऑफिशियल जिला बदर, जल्द फिर मिलेंगे।” इसके साथ उन्होंने #UGCRollBack का हैशटैग लगाकर साफ कर दिया कि वे यूजीसी की नई नियमावली के खिलाफ अपने विरोध से पीछे हटने वाले नहीं हैं।
बरेली में हुआ हाई-वोल्टेज ड्रामा
बुधवार सुबह से ही बरेली के एडीएम कंपाउंड में तनाव का माहौल था। प्रशासन ने उनके आवास पर निलंबन का नोटिस चस्पा किया, जिसके बाद एडीएम सिटी और एसडीएम सदर समेत कई अधिकारी उन्हें मनाने पहुंचे। जब पुलिस की गाड़ियां उन्हें लेकर निकलने लगीं, तो बाहर खड़े समर्थकों को लगा कि उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया जा रहा है। गुस्साए लोग गाड़ियों के सामने लेट गए और पुलिस के साथ जबरदस्त धक्का-मुक्की हुई। भारी हंगामे के बीच जब पुलिस का काफिला बाहर निकला, तो गाड़ी में बैठे अलंकार ने मीडिया से बात तो नहीं की, लेकिन हाथ से ‘विक्ट्री’ (जीत) का इशारा कर अपना इरादा साफ कर दिया।
प्रशासन बनाम अलंकार: दावों में विरोधाभास
बरेली जिला प्रशासन का कहना है कि अलंकार अग्निहोत्री अपने परिवार की सहमति से स्वेच्छा से लखनऊ रवाना हुए हैं। लेकिन अलंकार के स्टेटस ने तस्वीर बदल दी। उन्होंने लिखा, “मैं बरेली छोड़ने को तैयार हो गया क्योंकि पुलिस-प्रशासन नहीं चाहता था कि मैं वहां रहूं।” अब क्या होगा अगला कदम? अलंकार अग्निहोत्री पहले प्रयागराज जाकर हाईकोर्ट में याचिका दायर करना चाहते थे, लेकिन फिलहाल वे लखनऊ में हैं। समर्थकों का आरोप है कि उनका मोबाइल नंबर बंद कराया गया और उन्हें ‘हाउस अरेस्ट’ जैसी स्थिति में रखकर जबरन शहर छुड़वाया गया। लखनऊ पहुंचने के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि क्या वे राजधानी से इस आंदोलन को कोई नया मोड़ देंगे।
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