इमरजेंसी के नायक को कैद क्यों?’ — जयप्रकाश नारायण की जयंती पर सपा नेता की होर्डिंग से सियासी तूफान
Lucknow News: उत्तर प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। जयप्रकाश नारायण की जयंती (11 अक्टूबर) के मौके पर लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी मुख्यालय के बाहर एक विवादित होर्डिंग लगाई गई, जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।
यह होर्डिंग समाजवादी छात्रसभा के प्रदेश उपाध्यक्ष धीरज श्रीवास्तव की ओर से लगवाई गई है। इसमें लोकनायक जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा को ढका हुआ दिखाया गया है और साथ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव की तस्वीर के साथ बड़ा सवाल लिखा गया है:
“इमरजेंसी के नायक लोकनायक जयप्रकाश नारायण को कैद क्यों?”
सोशल मीडिया पर इस होर्डिंग की तस्वीरें वायरल होते ही बयानबाजी का सिलसिला शुरू हो गया है।
सपा छात्रसभा के नेता धीरज श्रीवास्तव ने सवाल उठाते हुए कहा कि,“संपूर्ण क्रांति के जनक और आपातकाल के नायक जयप्रकाश नारायण को आखिर क्यों परतंत्रता की बेड़ियों में जकड़ा गया है?”

उन्होंने आगे कहा कि JP ने पूंजीवादी प्रवृत्तियों के खिलाफ छात्रों, युवाओं और आम जनता को एकजुट कर ‘संपूर्ण क्रांति’ का ऐसा आंदोलन खड़ा किया, जिसने कांग्रेस की दशकों पुरानी सत्ता को हिला दिया। “ऐसे नायक की प्रतिमा आज भी प्रतीकात्मक रूप से कैद है — ये सिर्फ मेरा नहीं, पूरे देश का सवाल है,” उन्होंने जोड़ा।
JPNIC परिसर सील, भारी पुलिस बल तैनात
इस बीच, लखनऊ प्रशासन ने जयप्रकाश नारायण नेशनल कन्वेंशन सेंटर (JPNIC) में सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए हैं।
- पूरा परिसर सील कर दिया गया है।
- प्रवेश द्वारों को बंद कर वहां टिन शेड की दीवारें खड़ी कर दी गई हैं।
- आम नागरिकों का प्रवेश रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई है।
- परिसर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात है।

प्रशासन ने यह कदम बीते वर्षों की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए उठाया है। दरअसल, 2023 और 2024 में अखिलेश यादव को JPNIC में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बावजूद वे गेट फांदकर अंदर पहुंचे थे और जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया था। इस बार प्रशासन पहले से ही सतर्क है और सभी राजनीतिक दलों को अपने कार्यक्रमों की पूर्व सूचना देने के निर्देश जारी किए गए हैं।
क्या है JPNIC विवाद की जड़?
JPNIC को लेकर हर साल समाजवादी पार्टी और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बनती रही है।
सपा का आरोप है कि केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकार जानबूझकर JP की विचारधारा को हाशिये पर धकेल रही है और प्रतिमा को सार्वजनिक श्रद्धांजलि से रोका जा रहा है। वहीं प्रशासन इसे सुरक्षा और अनुशासन का विषय बताता है।

