‘लखनऊ आने पर शंकराचार्य का करेंगे स्वागत’, केशव प्रसाद मौर्य का बड़ा बयान

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोमवार को वाराणसी सर्किट हाउस में मीडिया से मुखातिब होते हुए कई अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा लखनऊ में ‘गो प्रतिष्ठा धर्म युद्ध’ के ऐलान और उनके खिलाफ चल रही जांच के बीच मौर्य का यह बयान काफी संतुलित और सधा हुआ माना जा रहा है।

“राम भक्त के नाते करेंगे शंकराचार्य का स्वागत”

जब पत्रकारों ने उनसे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के लखनऊ आगमन और उनके साथ तनातनी को लेकर सवाल किया, तो मौर्य ने कहा “शंकराचार्य जी महाराज अगर राजधानी आते हैं, तो एक राम भक्त होने के नाते हम उनका स्वागत करेंगे। इसमें कोई दो राय नहीं है।” हालांकि, उन्होंने गाय को ‘राज्य माता’ का दर्जा देने की मांग को यह कहते हुए टाल दिया कि इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि यह वैसा ही है जैसे बाबा विश्वनाथ को ‘विश्व का नाथ’ होने का दर्जा देना—अर्थात वे पहले से ही सर्वोच्च स्थान पर हैं।

डिप्टी सीएम ने प्रदेश में कानून व्यवस्था और गो-संरक्षण पर गर्व जताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में अब गो-भक्तों की सरकार है। उन्होंने कड़े लहजे में कहा “आज यूपी में किसी गो-तस्कर की इतनी औकात नहीं है कि वह गाय को एक खरोंच भी लगा सके। हमारी सरकार में गाय पूरी तरह सुरक्षित हैं और तस्करों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति जारी है।”

अखिलेश यादव पर तीखा हमला: बताया ‘ढोंगी’

राजनीतिक चर्चा के दौरान केशव प्रसाद मौर्य ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को आड़े हाथों लिया। उन्होंने उन्हें ‘ढोंगी’ करार देते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी दल केवल चुनाव के समय हिंदू प्रेम का नाटक करते हैं। मौर्य ने कहा विपक्षी दल केवल मुस्लिम वोट बैंक के लिए राजनीति करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा शासन में राम, कृष्ण और शिव भक्तों पर अत्याचार किए गए। डिप्टी सीएम ने भविष्यवाणी की कि 2047 तक केंद्र और राज्य दोनों जगह ‘कमल’ खिलता रहेगा और भाजपा की सरकार बनी रहेगी।

चर्चा में क्यों है यह बयान?

केशव प्रसाद मौर्य का यह बयान ऐसे समय आया है जब एक तरफ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने 12 मार्च को लखनऊ में बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है, वहीं दूसरी तरफ उनके खिलाफ कुछ आरोपों की जांच भी चल रही है। ऐसे में सरकार ने ‘स्वागत’ की बात कहकर टकराव को टालने और अपनी ‘गो-भक्त’ छवि को बरकरार रखने की कोशिश की है।

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