राष्ट्रपति ने 75वें संविधान दिवस पर कहा- लोकतंत्र की मजबूत नींव से भारत बन रहा तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

Sandesh Wahak Digital Desk: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को संसद के संविधान सदन में आयोजित 75वें संविधान दिवस कार्यक्रम के मौके पर देश के नागरिकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि संविधान को अपनाने के समय जो तर्क दिए गए थे, वे आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि संविधान बनाने वालों का मुख्य मकसद इसके ज़रिए हमारी सामूहिक और व्यक्तिगत गरिमा तथा आत्म-सम्मान को मजबूत बनाना था।

उन्होंने इस बात पर गर्व जताया कि पिछले दशकों में हमारे सांसदों और संसद ने जनता की आवाज़ को प्रभावी तरीके से सदन में पहुँचाया है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में हमारा संविधान लोगों की उम्मीदों को जाहिर करने के लिए एक बहुत असरदार फ्रेमवर्क देता है। राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान के आदर्श सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व के मूल्यों पर आधारित हैं, और हमारे संसद सदस्यों ने इन आदर्शों को व्यवहार में उतारने का काम किया है। आज भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है, और इसका श्रेय हमारी संस्कृति, संविधान और लोकतंत्र की मजबूत नींव को जाता है।

उपराष्ट्रपति और स्पीकर ने किया संविधान निर्माताओं को याद

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी सभा को संबोधित किया और संविधान निर्माताओं को श्रद्धांजलि दी। 26 नवंबर, 1949 को आजाद भारत की संविधान सभा ने हमारे पवित्र संविधान को अपनाया था। उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद और संविधान सभा के अन्य सदस्यों को याद करते हुए कहा कि संविधान लाखों देशवासियों की समझ, त्याग और सपनों का परिणाम है, और यह साबित करता है कि भारत एक है और हमेशा एक रहेगा।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने संविधान सदन को वह पवित्र जगह बताया, जहाँ गहरी चर्चा और सोच-विचार के बाद संविधान को आकार दिया गया। उन्होंने कहा कि संविधान के मार्गदर्शन में पिछले सात दशकों में भारत ने सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के लिए नीतियाँ बनाई हैं।

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