SGPGI में ‘वर्क एथिक्स’ ट्रेनिंग: अब मरीज़ों की भावनाओं को समझेंगे कर्मचारी, CMS ने दिए खास टिप्स

Sandesh Wahak Digital Desk: संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGI) के डॉ. हरगोबिंद खुराना ऑडिटोरियम में संस्थान के रिसेप्शनिस्ट, जूनियर रिसेप्शन ऑफिसर्स, पब्लिक रिलेशन ऑफिसर्स, मेडिकल सोशल वर्कर्स और नर्सिंग स्टाफ के लिए कार्य नैतिकता (Work Ethics) पर एक विशेष ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया।

संचार कौशल और सहानुभूति पर ज़ोर

कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) प्रो. देवेंद्र गुप्ता ने अस्पताल व्यवस्था में संचार कौशल के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा “रोगियों के दृष्टिकोण और उनकी भावनाओं को समझकर उन्हें हर संभव सहायता प्रदान की जाए। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य अच्छे संचार कौशल विकसित करना है और ऐसे कार्यक्रम नियमित अंतराल पर आयोजित होने चाहिए।”

मेडिकल सुपरिंटेंडेंट प्रो. आर. हर्षवर्धन ने गैर-मौखिक संचार (Non-verbal communication) की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “शब्द केवल अपनी बात व्यक्त करने का माध्यम हैं, लेकिन हम कैसे संवाद करते हैं, यह अधिक महत्वपूर्ण है।” उन्होंने कर्मचारियों को रोगियों और उनके परिजनों से बातचीत करते समय शांत, संयमित और भावनात्मक रूप से संतुलित रहने तथा सुनने की कला सीखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

‘एक संतुष्ट मरीज हजार विज्ञापनों के बराबर’

कार्यक्रम में लखनऊ विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग के प्रो. डॉ. मुकुल श्रीवास्तव ने अतिथि व्याख्यान दिया। उन्होंने कार्य नैतिकता के महत्व को समझाते हुए कहा कि अनुशासन, समय प्रबंधन और व्यवहारिक कौशल विकसित करने की आवश्यकता पर बात की, जो किसी भी संगठन को उत्कृष्ट प्रतिष्ठा दिलाते हैं।

डॉ. श्रीवास्तव ने कहा, “एक संतुष्ट मरीज हजार विज्ञापनों के बराबर होता है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि रोगी की गरिमा सर्वोपरि है और हमें हर स्थिति में इसकी रक्षा और सम्मान करना चाहिए। उन्होंने प्रथम संपर्क में आने वाले कर्मचारियों को ‘शॉक एब्जॉर्बर’ की तरह काम करने और सहानुभूतिपूर्वक सुनने की कला सीखने की सलाह दी।

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