विश्व हेड इंजरी दिवस: सिर की चोट के बाद ‘पुनर्वास’ ही जीवन की नई राह, SGPGI ने बताया रिकवरी का मंत्र

Sandesh Wahak Digital Desk: हर साल 20 मार्च को दुनिया भर में ‘विश्व हेड इंजरी दिवस’ मनाया जाता है। इसका मकसद सड़क हादसों, खेल या गिरने की वजह से होने वाली सिर की गंभीर चोटों (ट्रॉमैटिक ब्रेन इंजरी – TBI) के प्रति लोगों को सचेत करना है। इसी कड़ी में राजधानी लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) स्थित एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में शुक्रवार को एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

सिर्फ इलाज काफी नहीं, ‘पुनर्वास’ है जरूरी

फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन (PMR) विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि सिर की चोट के बाद केवल ऑपरेशन या दवाई ही काफी नहीं है। मरीज को फिर से सामान्य जीवन में लौटाने के लिए ‘रिहैबिलिटेशन’ (पुनर्वास) सबसे निर्णायक भूमिका निभाता है।

विश्व हेड इंजरी दिवस: सिर की चोट के बाद 'पुनर्वास' ही जीवन की नई राह

SGPGI विशेषज्ञों के 5 ‘रिकवरी मंत्र’

कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने मरीजों और तीमारदारों को रिकवरी के पांच मुख्य स्तंभ बताए।

चेस्ट फिजियोथेरेपी: सांस से जुड़ी जटिलताओं को रोकने के लिए सरल और प्रभावी उपाय।

फिजियो व ऑक्यूपेशनल थेरेपी: मरीज की गतिशीलता बढ़ाने और उसे आत्मनिर्भर बनाने पर फोकस।

सही पोषण: तेजी से रिकवरी के लिए विशेषज्ञों द्वारा बताया गया संतुलित आहार।

व्यवहारिक प्रबंधन: चोट के बाद होने वाली मानसिक और भावनात्मक चुनौतियों से निपटने के तरीके।

शीघ्र हस्तक्षेप: जितनी जल्दी पुनर्वास शुरू होगा, परिणाम उतने ही बेहतर होंगे।

विशेषज्ञों की राय: सड़क सुरक्षा ही बचाव है

एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख प्रो. अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि टीबीआई मरीजों के लिए समन्वित पुनर्वास की सख्त जरूरत है। वहीं, पीएमआर विभाग के डॉ. सिद्धार्थ राय ने बताया कि सिर की चोट के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, ऐसे में हेलमेट पहनना और सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करना ही सबसे बड़ा बचाव है।

इस दौरान इंटरैक्टिव सत्र भी हुए, जहाँ मरीजों के परिजनों ने अपनी समस्याएं साझा कीं और डॉक्टरों से उनके व्यावहारिक समाधान जाने।

Also Read: योगी सरकार का बड़ा फैसला, यूपी में ‘फंसी’ संपत्तियों का रास्ता साफ, OTS योजना लागू

Get real time updates directly on you device, subscribe now.