UP News: आयुष्मान अस्पतालों को अब 30 दिन में मिलेगा भुगतान, पिछले एक साल में बांटे 4,649 करोड़
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार गरीबों को मुफ्त और बेहतर इलाज देने के अपने संकल्प को और मजबूती से लागू कर रही है। ‘आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ के तहत अब अस्पतालों के क्लेम (भुगतान) को रोकने या लटकाने की परंपरा खत्म हो गई है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद, पिछले एक साल में न केवल पुराने अटके हुए बिलों का निपटारा किया गया, बल्कि नई भुगतान प्रक्रिया को भी बेहद तेज कर दिया गया है।
पेंडेंसी में भारी गिरावट: 10 लाख से घटकर 3 लाख हुए केस
स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि पिछले एक साल में क्लेम निपटाने की रफ्तार में ऐतिहासिक सुधार हुआ है। जनवरी 2025 में जहां 10.75 लाख क्लेम लंबित थे, वहीं दिसंबर 2025 तक इसे घटाकर मात्र 3 लाख कर दिया गया है। प्रदेश में हर महीने औसतन 2 लाख नए क्लेम आते हैं। सरकार की कोशिश है कि पुराने बिलों के साथ-साथ नए बिलों का भी समय पर भुगतान हो ताकि अस्पताल मरीजों को लौटाने का बहाना न बना सकें।

जांच टीम हुई तीन गुना बड़ी, ऑडिट व्यवस्था मजबूत
भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी लाने के लिए विभाग ने अपने संसाधनों में बड़ा इजाफा किया है।
ऑडिटर्स की संख्या बढ़ी: मेडिकल ऑडिट करने वाले विशेषज्ञों की संख्या 40 से बढ़ाकर 130 कर दी गई है।
प्रोसेसिंग डेस्क में वृद्धि: क्लेम प्रोसेसिंग डेस्क (CPD) की संख्या भी 100 से बढ़ाकर 125 की गई है।
डेडलाइन: लक्ष्य तय किया गया है कि 30 दिनों के भीतर (TAT – टर्न अराउंड टाइम) हर हाल में अस्पतालों को भुगतान कर दिया जाए।
अस्पतालों को मिला आर्थिक सहारा
आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 के बीच प्रदेश के सरकारी और निजी अस्पतालों को कुल 4,649 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। समय पर पैसा मिलने से अस्पतालों का भरोसा बढ़ा है, जिसका सीधा फायदा उन गरीब मरीजों को मिल रहा है जिन्हें अब इलाज के लिए अपनी जमीन-जेवर बेचने की जरूरत नहीं पड़ती।
सरकार की इस सक्रियता से अब आयुष्मान कार्ड धारकों को अस्पतालों में भर्ती करने या इलाज देने में आनाकानी करने की शिकायतों में भी कमी आने की उम्मीद है।
Also Read: कानपुर के प्रतिष्ठित शर्मा परिवार के कैलाश नाथ थामेंगे भाजपा का दामन

