आज़म खान से मुलाकात रोके जाने पर भड़के युसूफ मलिक, जेल प्रशासन पर लगाया मनमानी का आरोप
Sandesh Wahak Digital Desk: रामपुर जेल में सोमवार को उस समय नया विवाद खड़ा हो गया, जब समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म खान के करीबी और उनके पैरोकार युसूफ मलिक को जेल प्रशासन ने मुलाकात की अनुमति देने से इनकार कर दिया। जेल सुपरिटेंडेंट की इस कार्रवाई से नाराज़ मलिक ने प्रशासन पर जमकर भड़ास निकाली और इसे “ज्यादती” और “खुलेआम बदमाशी” करार दिया।
जेलर पर गुंडागर्दी का आरोप
युसूफ मलिक ने कहा कि वह आज़म खान के मुकदमों की पैरवी कर रहे हैं और ऐसे में उनसे मुलाकात का रोकना न्याय के काम में रुकावट डालने जैसा है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जेल प्रशासन अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए मुलाकात रोक रहा है। मलिक ने आरोप लगाया, यह जेलर की खुलेआम गुंडागर्दी है। रामपुर के जेलर की बहुत बड़ी बदमाशी है कि उन्होंने मुझे आज़म साहब से मुलाकात नहीं करने दी।
युसूफ मलिक ने कहा कि जेल प्रशासन की यह कार्रवाई जेल मैनुअल के खिलाफ है और वह इस मामले को लेकर अदालत जाएंगे। उन्होंने कहा कि जेलर ने नियमों का उल्लंघन किया है, इसलिए उन्हें इसके परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आज़म खान पर सौ से अधिक मुकदमे दर्ज होने के बावजूद ज्यादातर मामलों में उन्हें राहत मिल रही है। हमें इंसाफ मिला है और मिलेगा।

किस मामले में जेल में हैं आज़म खान?
सपा नेता आजम खान फिलहाल पैन कार्ड मामले में सजा काट रहे हैं। रामपुर की MP-MLA कोर्ट ने इस केस में आज़म खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म को सात-सात साल की सजा सुनाई है। यह पूरा मामला 2019 में दर्ज हुआ था, जब तत्कालीन विधायक आकाश सक्सेना ने शिकायत की थी कि अब्दुल्ला आज़म ने दो अलग-अलग जन्म तिथियों के आधार पर दो पैन कार्ड बनवाए। जांच और सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों को दोषी करार दिया। फैसले के बाद आकाश सक्सेना ने इसे सत्य की जीत बताया था।
युसूफ मलिक के आरोपों से बढ़ा राजनीतिक तापमान
दरअसल मुलाकात रोके जाने के बाद युसूफ मलिक द्वारा उठाया गया मुद्दा न केवल न्यायिक प्रक्रिया बल्कि राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है। मलिक का दावा है कि जेल प्रशासन जानबूझकर आज़म खान को मानसिक और कानूनी रूप से कमजोर करने की कोशिश कर रहा है, जबकि वह केवल अपने मुवक्किल से मुकदमों पर चर्चा करना चाहते थे। वहीं इस पूरे घटनाक्रम ने रामपुर जेल प्रशासन के कार्यों पर सवाल खड़े कर दिए हैं और आने वाले दिनों में संभव है कि यह मामला अदालत और राजनीतिक बहस दोनों में गूंजे।
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