संपादक की कलम से: भारत-पाक संघर्ष में चीन को चोट
Sandesh Wahak Digital Desk: पहलगाम हमले के आंतकियों के लिए चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर में नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने पर पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया। तीन दिन तक चले इस संघर्ष में भारतीय सेना ने न केवल पाकिस्तान के हमलों को पूरी तरह विफल कर दिया बल्कि भीषण पलटवार कर भारी नुकसान पहुंचाया। सेना ने न केवल पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन और मिसाइलों बल्कि उसके कई सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया है।
भारतीय हमले से पस्त पाक के डीजीएमओ ने भारतीय डीजीएमओ से सीजफायर का आग्रह किया, जिसे मान लिया गया है। हालांकि भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान पर लगाए गए अन्य प्रतिबंध लागू रहेंगे। इस संघर्ष में सबसे अधिक पाक का नुकसान हुआ है लेकिन इसने चीन की साख को सबसे अधिक चोट पहुंचाई है और आने वाले दिनों में इसका असर दिखाई पड़ेगा। इसी बौखलाहट का परिणाम है कि अब चीन खुलेआम कहने लगा है कि वह पाकिस्तान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।
सवाल यह है कि :-
- भारतीय सेना ने चीन को कैसी चोट पहुंचाई है कि वह बौखला गया?
- क्या इस संघर्ष ने भारतीय मिसाइलों और रणनीति की प्रामाणिकता पर मुहर लगा दी है?
- क्या चीन की महाशक्ति बनने के सपने पर वैश्विक स्तर पर असर पड़ा है?
- क्या इस संघर्ष का असर चीन के हथियार बाजार और उसकी हिंद-प्रशांत क्षेत्र और ताइवान समेत अन्य छोटे देशों पर पड़ेगा?
दरअसल, पाकिस्तान ने भारत पर चीन के हथियारों, मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया था। इन सभी को भारत ने अपनी आकाश मिसाइल, ड्रोन भेदी गन और डिफेंस सिस्टम के जरिए तबाह कर दिया था। चीन की मिसाइल पीएल-15, एयरक्राफ्ट जेएफ-17 और उसके एयर डिफेंस सिस्टम को भारतीय सेना ने नष्टï कर दिया है।
चीन का एयर डिफेंस सिस्टम भारतीय ड्रोन के सामने फेल
हैरानी की बात यह है कि चीन का एयर डिफेंस सिस्टम भारतीय ड्रोन तक को नुकसान नहीं पहुंचा सका। चीनी हथियारों को तबाह होते देख पाकिस्तान के हौसले पस्त हो गए लेकिन इसने अंतरराष्ट्रीय हथियार बाजार में यह संदेश भेज दिया कि चीन निर्मित हथियारों की गुणवत्ता बेहद खराब है और इनकी खरीद से कोई फायदा नहीं होने वाला है।
यही नहीं चीनी हथियारों का हश्र देखकर ताइवान, फिलीपींस और वियतनाम जैसे छोटे देश भी खुश हैं। उन्हें लगने लगा है कि चीन के हथियार उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकते हैं। वहीं भारत ने इस संघर्ष में अपने स्वदेशी हथियारों की अचूक मारक क्षमता दिखा दी। जाहिर है, जो देश अभी तक भारत से ब्रह्मोस खरीद रहे थे अब वे इन हथियारों की खरीद भी करेंगे। इस संघर्ष ने वैश्विक हथियार बाजार में भारत की धाक जमा दी है। वहीं चीनी हथियारों के नाकाम होने पर उसके वैश्विक महाशक्ति बनने के सपने को भी सीधे चोट पहुंची है। जाहिर है, यह संघर्ष चीन को निकट भविष्य में न केवल बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचाएगा बल्कि उसकी साख को भी मिट्टी में मिला दिया।
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