एनकाउंटर के छह साल बाद भी नहीं बन पाया विकास दुबे का डेथ सर्टिफिकेट, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
Kanpur News: कानपुर के चर्चित बिकरू कांड के बाद एनकाउंटर में ढेर हुए विकास दुबे को मौत के छह साल बीत जाने के बावजूद अब तक आधिकारिक मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं हो सका है। इस देरी की सबसे बड़ी वजह पंचायतनामे में उनके पिता के नाम की वर्तनी में हुई एक मामूली सी चूक है। दस्तावेजों में रामकुमार की जगह राजकुमार लिखे जाने के कारण पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया ठप पड़ गई है। हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद अब स्वास्थ्य विभाग ने हरकत में आकर इस त्रुटि को सुधारने की पहल शुरू कर दी है।
गलती की जड़ तक पहुंचे अधिकारी
दरअसल, विकास दुबे के पिता का सही नाम रामकुमार है, लेकिन 2020 में एनकाउंटर के बाद बनाए गए पंचायतनामे में लिपिकीय भूल के चलते उनका नाम राजकुमार दर्ज कर लिया गया। इसी गलती ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट से लेकर डिस्पोजल स्लिप तक सभी आधिकारिक कागजातों में अपना रास्ता बना लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मंगलवार को सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी ने खुद पोस्टमार्टम हाउस का दौरा किया और सभी पुराने रजिस्टरों व दस्तावेजों की बारीकी से जांच की। उन्होंने पोस्टमार्टम प्रभारी विपुल चतुर्वेदी और अन्य कर्मचारियों से करीब एक घंटे तक इस विसंगति को लेकर चर्चा की।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद हिला प्रशासन
विकास दुबे की पत्नी ऋचा दुबे पिछले काफी समय से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराने के लिए नगर निगम, पोस्टमार्टम हाउस और स्वास्थ्य विभाग के चक्कर लगा रही थीं, लेकिन कहीं से कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। आखिरकार उन्होंने इस मामले को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय ने इस पर सख्त टिप्पणी करते हुए स्वास्थ्य विभाग से मामले की पूरी रिपोर्ट मांगी है। इसी न्यायिक हस्तक्षेप के बाद सीएमओ ने सक्रियता दिखाई और गलत दर्ज नाम को सही कराने की औपचारिकताएं शुरू कर दी हैं। सीएमओ ने स्पष्ट किया कि नाम सही होते ही मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा, ताकि परिवार को संपत्ति हस्तांतरण जैसी कानूनी परेशानियों का सामना न करना पड़े।
निरीक्षण के दौरान सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट की अन्य परेशानियाँ
अपने दौरे के दौरान सीएमओ को पोस्टमार्टम हाउस के बाहर मौजूद कुछ पुलिसकर्मियों ने भी अपनी समस्याओं से अवगत कराया। उन्होंने शिकायत की कि पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें रिपोर्ट लेने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है और कई बार तो बिना रिपोर्ट के ही वापस लौटना पड़ता है। इस पर सीएमओ ने पोस्टमार्टम प्रभारी से सख्ती से पूछताछ की। प्रभारी ने जवाब दिया कि रिपोर्टें अब ऑनलाइन सिस्टम से जारी की जाती हैं, फिर भी समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

