IAS रिंकू सिंह राही का सीनियर अफसरों पर तंज, बोले- न्यायिक कार्यों से हटाने की रची जा रही साजिश
Jalaun News: उत्तर प्रदेश के जालौन जिले की उरई तहसील में एसडीएम (न्यायिक) पद पर तैनात चर्चित आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने एक बार फिर प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। उन्होंने बिना नाम लिए अपने ही महकमे के सीनियर अफसरों और स्थानीय तंत्र पर निशाना साधा है। राही ने गंभीर आरोप लगाया है कि कुछ प्रभावशाली लोग साजिश के तहत उन्हें न्यायिक कार्यों के लिए अयोग्य और अनुपयुक्त साबित करने की कोशिश में लगे हैं, और इसी रणनीति के तहत तहसील में लेखपालों से कार्य बहिष्कार कराया जा रहा है।
एक छोटी सी भूल और काम तमाम
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (ट्विटर) पर अपनी बात रखते हुए आईएएस रिंकू सिंह राही ने लिखा कि उनके खिलाफ पूरी फील्डिंग पहले से सेट कर दी गई है। उन्होंने पोस्ट में लिखा कि अधिवक्ताओं ने पहले से ही कार्य बहिष्कार कर रखा है और अब लेखपालों को भी आगे कर दिया गया है। पूरी कोशिश सिर्फ यह सिद्ध करने की है कि वे न्यायिक जिम्मेदारियां संभालने के लायक नहीं हैं। उन्होंने तंज कसते हुए आगे लिखा कि एक छोटी सी भूल और काम तमाम… मैं अपना काम तमाम करवाने को भी तैयार हूं।
यूट्यूब पर लाइव कर रहे कोर्ट की सुनवाई
अधिकारियों की मंशा पर सवाल उठाते हुए रिंकू सिंह राही ने कहा कि उनकी पूरी कोशिश है कि काम में कोई भूल-चूक न हो, और अगर कोई मानवीय भूल हो भी, तो वह बिना किसी बदनीयती की छोटी-मोटी गलती हो। अपनी निष्पक्षता और कार्यशैली में पारदर्शिता साबित करने के लिए उन्होंने अनोखी पहल की है। उन्होंने ‘एसडीएम जुडिशल उरई’ नाम से यूट्यूब चैनल बनाकर न्यायालय की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग ऑनलाइन उपलब्ध करा दी है, ताकि उनके शुभचिंतक खुद रिकॉर्डिंग देखकर तुरंत उनकी गलतियों से अवगत करा सकें।
लेखपाल संघ का आरोप, एसडीएम बना रहे अनावश्यक दबाव
दूसरी ओर, लेखपाल संघ ने आईएएस अधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ ने जालौन के जिलाधिकारी (डीएम) को एक ज्ञापन सौंपकर एसडीएम (न्यायिक) पर तय कानूनी प्रक्रियाओं के विपरीत जाकर दस्तावेज मांगने और कर्मचारियों पर अनावश्यक मानसिक दबाव बनाने का आरोप लगाया है। लेखपालों का कहना है कि इसी कार्यप्रणाली के विरोध में वे कार्य बहिष्कार करने को मजबूर हुए हैं।
भ्रष्टाचार के खिलाफ पहले भी खोल चुके हैं मोर्चा
गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब 2008 बैच के आईएएस रिंकू सिंह राही अपनी ही सरकार और तंत्र के खिलाफ मुखर हुए हैं। इससे पहले 31 अगस्त को उन्होंने सरकारी वाहनों की आउटसोर्सिंग में बड़े पैमाने पर चल रहे भ्रष्टाचार और धांधली का खुलासा किया था। इस संबंध में उन्होंने श्रमायुक्त और परिवहन आयुक्त को बाकायदा पत्र भेजकर जांच की मांग की थी। तब भी उन्होंने साफ कहा था कि अगर मैं भ्रष्टाचार रोक नहीं सकता, तो उसे उजागर कर ऑन-रिकॉर्ड जरूर ला सकता हूं।
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